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2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, केंद्र का नोटिफिकेशन जारी
2,000 रुपये तक के UPI पर नहीं लगेगा कोई शुल्क

2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, केंद्र का नोटिफिकेशन जारी

Sep 15, 2026
09:26 am

क्या है खबर?

केंद्र सरकार ने 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट और रुपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब बैंक या पेमेंट सिस्टम चलाने वाली कंपनियां इन भुगतानों पर ग्राहक से कोई सीधा या छिपा हुआ चार्ज नहीं ले सकेंगी। सरकार ने इसके लिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत नियमों में बदलाव किया है। इससे छोटे डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

नियम

नए नियम का क्या है मतलब?

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A के तहत केंद्र सरकार ने रुपे डेबिट कार्ड और 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के तरीके के रूप में तय किया है।

इसके तहत कोई बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने या पाने वाले व्यक्ति से सीधे या किसी दूसरे तरीके से शुल्क नहीं ले सकता।

इन भुगतानों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त चार्ज लगाना मना है।

बोझ

क्या ग्राहकों पर बढ़ेगा कोई बोझ?

इन नियमों से आम ग्राहकों पर सीधे तौर पर कोई बोझ नहीं बढ़ेगा।

2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट पहले की तरह बिना शुल्क किए जा सकेंगे। हालांकि, सरकार ने ज्यादा रकम वाले कुछ व्यापारिक UPI भुगतानों पर मामूली मर्चेंट शुल्क लगाने का रास्ता खोला है।

यह शुल्क ग्राहकों के बजाय दुकानदारों पर लागू होगा। इसलिए सामान्य ग्राहक और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले भुगतान मुफ्त बने रहेंगे।

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कोशिश

डिजिटल पेमेंट को मजबूत बनाने की कोशिश

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत और लंबे समय तक चलने लायक बनाना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, मर्चेंट डिस्काउंट रेट दुकानदारों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं। इससे बैंक और फिनटेक कंपनियां पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा और तकनीक में ज्यादा निवेश कर सकेंगी।

केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि छोटे UPI और रुपे भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।

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सवाल

फैसले पर सोशल मीडिया में उठे सवाल

सरकार ने कहा है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI लेनदेन पर लगने वाला शुल्क ग्राहकों के बजाय मर्चेंट को देना होगा।

हालांकि, सोशल मीडिया पर यूजर्स इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मर्चेंट हर बड़े लेनदेन पर लगातार अपनी जेब से पैसा क्यों देंगे।

आशंका जताई जा रही है कि दुकानदार आगे चलकर यह बोझ किसी न किसी तरीके से ग्राहकों से ही वसूल सकते हैं।

ट्विटर पोस्ट

यहां देखें पोस्ट

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