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क्यों ब्याज दर गिरने का लोन की EMI पर ज्यादा नहीं पड़ता असर?
ब्याज दर गिरने का EMI पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है

क्यों ब्याज दर गिरने का लोन की EMI पर ज्यादा नहीं पड़ता असर?

Mar 03, 2026
07:20 am

क्या है खबर?

कई बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लोन की ब्याज दर घटा देती है, लेकिन सभी कर्जदारों को तुरंत इससे राहत नहीं मिलती है। असल में हर बार ब्याज दर में बदलाव होने पर आपका होम लोन या पर्सनल लोन अपने आप रीसेट नहीं होता है। आपकी EMI आपके लोन अनुबंध की शर्तों के अनुसार तय होती है न कि बैंक की घोषणा के अनुसार बदलती है। आइये जानते हैं ब्याज दर घटने पर तुरंत लोन की EMI क्यों नहीं बदलती।

रीसेट तिथि

रीसेट तिथि से बदलती है EMI

अधिकांश लोन बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, लेकिन इनका रीसेट पूर्व निर्धारित अंतराल पर होता है। अगर, आपके लोन का रीसेट वार्षिक रूप से होता है और ब्याज दर में कटौती अभी हुई तो रीसेट तिथि तक कुछ भी नहीं बदलेगा। तब तक आपकी EMI पुरानी दर को ही दर्शाएगी, भले ही बाजार में बदलाव आ गया हो। इस कारण आपको केंद्रीय बैंक से मिली राहत तुरंत नहीं मिल पाती है।

लोन अवधि 

बैंक बढ़ा देती हैं लोन अवधि 

ब्याज दरें बढ़ने पर कई बैंक EMI की बजाय लोन की अवधि में बदलाव करते हैं। इससे आपकी मासिक किस्त स्थिर रहती है, लेकिन लोन धीरे-धीरे लंबा खिंचता चला जाता है। बाद में जब ब्याज दरें गिरती हैं तो बैंक ब्याज दर को उलट सकता है, लेकिन लोन की अवधि को बरकरार रख सकता है। आप कम ब्याज दर चुका रहे होते हैं, लेकिन लंबे समय तक चुकाना पड़ता है। कुछ मामलों में EMI भी बढ़ जाती है।

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लाभ 

ऋणदाता नहीं देते पूरा लाभ

सभी ब्याज दर से जुड़े लोन में ब्याज दरों में कटौती का लाभ समान रूप से नहीं मिलता। बेस रेट या MCLR से जुड़े पुराने लोन पर ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक धीरे-धीरे और असमान रूप से मिलते हैं। लागत बढ़ने पर बैंक ब्याज दरें बढ़ाने में तत्पर रहते हैं और कटौती करते समय अधिक सतर्क रहते हैं। बैंक ने स्प्रेड को समायोजित किया है तो ब्याज दर में कटौती का पूरा लाभ नहीं मिल सकता है।

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ब्याज 

इस तरह से बढ़ जाता है ब्याज 

कर्ज के शुरुआती सालों में आपकी EMI का एक बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। अगर, इस दौरान ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इसका असर और भी बढ़ जाता है, क्योंकि ब्याज की गणना एक बकाया राशि पर की जाती है। बाद में जब ब्याज दरें गिरती हैं तो लाभ कम होता है, क्योंकि नुकसान पहले ही हो चुका होता है। बीच में टॉप-अप लेने से EMI बढ़ जाती है। ऐसे में ब्याज दरने पर कोई असर नहीं पड़ता है।

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