लोकसभा में पारित हुआ दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक, जानिए कितने होंगे बदलाव
क्या है खबर?
लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य दिवालियापन प्रक्रिया में गई कंपनियों के मामलों का तेजी से समाधान करना है। इस विधेयक में कंपनी के डिफॉल्ट साबित हो जाने के बाद दिवालियापन के आवेदनों को स्वीकार करने के लिए 14 दिनों की अनिवार्य समय सीमा निर्धारित की गई है। इससे दिवालियापन हुई कंपनियों को समय पर राहत मिल सकेगी। आइए जानते हैं इसमें कुल कितने बदलाव होंगे।
बदलाव
विधेयक में कुल कितने बदलाव प्रस्तावित हैं?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि IBC केवल ऋण वसूली तंत्र के रूप में कार्य करने के लिए नहीं, बल्कि व्यवहार्य व्यवसायों को बचाने के लिए एक ढांचे के रूप में बनाई गई है। उन्होंने कहा कि विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनमें से 11 की सिफारिश विधेयक की जांच करने वाली चयन समिति ने की थी और एक संशोधन सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इससे समाधान तंत्र को और मजबूत किया जा सकेगा।
कारण
व्यापक मुकदमेबाजी है IBC समाधान में देरी का कारण- सीतारमण
सीतारमण ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि IBC समाधान में देरी का मुख्य कारण व्यापक मुकदमेबाजी है और IBC विधेयक में प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए दंड का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि IBC ने पिछले 10 वर्षों में कंपनियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश के बैंकिंग क्षेत्र की समग्र स्थिति में सुधार लाने में भी IBC एक अहम कारक रहा है। ऐसे में इसमें संशोधन करना आवश्यक हो गया था।
चर्चा
27 मार्च को हुई थी विधेयक पर चर्चा
सीतारमण द्वारा पेश विधेयक पर लोकसभा में 27 मार्च को चर्चा हुई थी। यह विधेयक, जिसे पहले एक चयन समिति को भेजा गया था, कंपनी या व्यक्ति की दिवालियापन संबंधी मामलों के निपटारे में होने वाली देरी को दूर करने के लिए लाया गया है। सीतारमण ने सदन में इस बात पर जोर दिया कि IBC का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली तंत्र के रूप में कार्य करना नहीं था। इसने बेहतर ऋण अनुशासन में भी योगदान दिया है।
पृष्ठभूमि
कब पेश किया गया था संशोधन विधेयक?
12 अगस्त, 2025 को सरकार ने लोकसभा में IBC संशोधन विधेयक पेश किया था, जिसमें दिवालियापन समाधान आवेदनों की स्वीकृति में लगने वाले समय को कम करने के प्रावधानों सहित कई बदलावों का प्रस्ताव किया गया। इस विधेयक को विपक्ष के कड़े विरोध के बीच लोकसभा की एक चयन समिति को भेजा गया था, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। बता दें कि IBC में अब तक 7 बार संशोधन किया जा चुका है।