भारत में तेजी से विकसित हो रहे GCC, करीब 9,000 अरब रुपये का किया कारोबार
भारत के वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) अब सिर्फ सहायता कार्यालय बनकर नहीं रह गए हैं। वे अब ग्लोबल प्रोजेक्ट्स, रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) और प्रोडक्ट डेवलपमेंट जैसे कामों में भी आगे बढ़ रहे हैं।
देशभर में ऐसे 2,100 से ज्यादा सेंटर्स हैं, जहां 23.6 लाख लोग काम करते हैं। इस साल इन सेंटर्स ने 100 अरब डॉलर (करीब 9,000 अरब रुपये) का कारोबार किया है। वर्तमान में ये हब टेक की दुनिया में एक बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं।
GCCs को करना होगा बदलाव
भारत की मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और 2.7 करोड़ डेवलपर्स की बड़ी संख्या, जिनमें से कई गिटहब जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं, देश को एक बड़ा फायदा देती है।
हालांकि, इस रास्ते में कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। तकनीकी प्रतिभाओं का वेतन लगातार बढ़ रहा है, बेंगलुरु जैसे शहरों में तो यह बढ़ोतरी सालाना 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। साथ ही, कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कौशल की कमी को पूरा करने के लिए भी लगातार कोशिशें कर रही हैं।
अपनी रफ्तार बनाए रखने और जोखिमों को कम करने के लिए किम्बर्ली-क्लार्क जैसी कंपनियां अब दूसरे देशों में भी अपना विस्तार कर रही हैं।
यह साफ संकेत है कि अगर, भारत के GCCs को दुनिया में अपनी धाक जमाए रखनी है तो उन्हें लगातार बदलाव और खुद को विकसित करते रहना होगा।