भारत के ER&D लगा रहे फिजिकल AI पर बड़ा दांव
भारत के इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D) क्षेत्र में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनियां अब फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अपना ध्यान बढ़ा रही हैं।
इसका सीधा मतलब है कि स्मार्ट टेक्नोलॉजी को फैक्ट्रियों, कारों, हेल्थकेयर डिवाइस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कामों में जोड़ा जा रहा है। जेनेरेटिव AI की वजह से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तेजी से हो रहा है और कीमतों के मॉडल भी बदले हैं, जिससे इस इंडस्ट्री में नए अवसरों के दरवाजे खुल गए हैं।
L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज के मृत्युंजय कुमार सिंह इस बदलाव को बहुत अहम बताते हैं। उनके मुताबिक, AI हमारे हर दिन के कामों का हिस्सा बन जाएगा और इससे आय के ऐसे नए स्रोत पैदा होंगे, जिनका हमने पहले कभी अनुभव नहीं किया।
2.3 लाख अरब रुपये तक बढ़ सकता है खर्च
नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) ने अनुमान लगाया है कि 2030 तक ग्लोबल ER&D पर कुल खर्च 2,500 अरब डॉलर (2.3 लाख अरब रुपये) तक पहुंच जाएगा।
इसके साथ ही, भारत का निर्यात भी करीब 4 गुना बढ़कर 21 अरब डॉलर (करीब 1,900 अरब रुपये) से 47 अरब डॉलर (करीब 4,300 अरब रुपये) तक होने की उम्मीद है, जो सालाना 12 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगा।
HCL टेक जैसी बड़ी कंपनियां अब सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग और फिजिकल AI के क्षेत्र में उतर रही हैं। ये कंपनियां एडवांस्ड नोड्स पर ASIC डेवलपमेंट का काम भी कर रही हैं।
उद्योग जगत के दिग्गजों का कहना है कि फिजिकल AI की हार्डवेयर, सेंसर्स और क्लाउड टेक्नोलॉजी जैसी पेचीदगी पुरानी और बड़ी कंपनियों को इस दौड़ में आगे बनाए रखती है। इससे नए इनोवेशन को बढ़ावा मिलता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का सामना करने की क्षमता भी बढ़ती है।