CERC ने प्रोजेक्ट में देरी होने पर भी ग्रिड कनेक्शन बनाए रखने की दी छूट
केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने अब हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट डेवलपर्स को यह अनुमति दे दी है कि वे तय समय-सीमा चूक जाने पर भी अपना ग्रिड कनेक्शन बनाए रख सकते हैं।
अब उन्हें तुरंत कनेक्शन खोना नहीं पड़ेगा, बल्कि देरी होने पर वे रोजाना के हिसाब से शुल्क चुका सकते हैं।
इस नए नियम से प्रोजेक्ट अटके नहीं रहेंगे और सीमित ट्रांसमिशन नेटवर्क का भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो पाएगा।
देरी के लिए शुल्क और समय-सीमा तय
अगर, कोई प्रोजेक्ट जमीन मिलने में देरी या फंडिंग दिक्कतों के कारण अटक जाता है तो डेवलपर्स को प्रति मेगावाट प्रति दिन 1,000 रुपये का शुल्क देना होगा, वहीं, प्रोजेक्ट कमर्शियल लॉन्च होने में देरी कर रहा है तो यह शुल्क प्रति मेगावाट प्रति दिन 3,000 रुपये होगा।
जमीन अधिग्रहण के लिए अधिकतम 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी, जबकि फंडिंग से जुड़ी समस्याओं के लिए 6 महीने तक का समय दिया गया है। प्रोजेक्ट का काम शुरू करने के लिए अधिकतम एक साल की छूट दी गई है।
अगर, डेवलपर्स इन नई समय-सीमाओं को भी पूरा नहीं कर पाते हैं तो उनके ग्रिड कनेक्शन और उससे जुड़ी बैंक गारंटियों को रद्द किया जा सकता है।
इस फैसले का उद्देश्य डेवलपर्स को उचित पहुंच प्रदान करना है। साथ ही भारत के उस बड़े लक्ष्य को हासिल करना भी है, जिसके तहत गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 300GW से बढ़ाकर 500GW तक पहुंचाया जाना है।