समुद्री मार्ग में अड़चन के कारण भारतीय कंपनियां हवाई माल ढुलाई पर ज्यादा निर्भर
त्योहारी सीजन आते ही सामान की मांग खूब बढ़ जाती है, लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से समुद्री रास्ते से माल पहुंचने में काफी देरी हो रही है।
इस मुश्किल से निपटने के लिए भारतीय निर्माता अब हवाई माल ढुलाई (एयर फ्रेट) का रुख कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां चिप्स और सर्किट बोर्ड जैसे जरूरी पुर्जे हवाई जहाज से मंगवा रही हैं। PG इलेक्ट्रोप्लास्ट जैसी कंपनियों के लिए सामान पहुंचने में 2 से 3 सप्ताह की देरी हो रही है।
दूसरी तरफ, भगवती प्रोडक्ट्स भी मेमोरी चिप्स हवाई रास्ते से मंगवा रही है। ऑटो कंपनियां भी समुद्री फ्रेट में आई इस रुकावट को संभालने में जुटी हैं। एक ऑटो-पार्ट्स कंपनी सड़क और हवाई परिवहन दोनों का मिलाकर इस्तेमाल कर रही है।
बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल रही कंपनियां
इस संकट के चलते सामान की ढुलाई का खर्च 5 गुना बढ़ गया है। यहां तक कि हवाई रास्ते से माल भेजने का किराया भी 3 गुना तक बढ़ गया है।
जो कंपनियां दूसरों के लिए सामान बनाती हैं, यानि कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स वे इस बढ़े हुए खर्च का पूरा या कुछ हिस्सा अपने ग्राहकों पर डाल रहे हैं, लेकिन जिन कंपनियों के अपने खुद के प्लांट हैं, उन्हें शायद अपने मुनाफे में कटौती करनी पड़ सकती है।
हुंडई मोटर भी अपने लॉजिस्टिक्स पार्टनर के साथ मिलकर समुद्री रास्ते से माल ढुलाई में आ रही इस बाधा से निपटने की कोशिश कर रही है। शारजाह पोर्ट के फिर से खुलने से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सप्लाई बेहतर हो सकेगी।