BRICS की बैठक के प्रस्तावों से MSME के लिए खुलेगा वैश्विक बाजार
जयपुर में BRICS देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक खत्म हुई, जिसमें उन्होंने 'आर्थिक भागीदारी 2030' नाम की अपनी योजना को मंजूरी दे दी है।
उनका मुख्य मकसद छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज लेना और उन्हें दुनियाभर के बाजारों से जोड़ना आसान बनाना है। अब उन्हें कर्ज देते समय सिर्फ उनकी संपत्ति ही नहीं, बल्कि उनके कारोबार के वित्तीय लेन-देन को भी देखा जाएगा। यह कदम नई 'जयपुर सहमति' का हिस्सा है।
इसी के तहत BRICS इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म की जांच-परख की जाएगी। इसके अलावा, निर्यात करने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) के लिए कर्ज का मूल्यांकन करने के दिशा-निर्देश भी अलग से जारी किए गए हैं।
WTO के सिस्टम में सुधार की मांग
इस समूह ने वैश्विक व्यापार के निष्पक्ष नियमों पर जोर दिया और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सिस्टम में सुधार की मांग की।
उन्होंने WTO में विवादों को निपटाने के तरीकों को बेहतर बनाने और विकासशील देशों में खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही।
साथ ही, उन्होंने खाद्य और दवा क्षेत्रों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भी कई योजनाएं पेश कीं। BRICS देशों के बीच डिजिटल सेवाओं को और सुचारु बनाने के लिए उन्होंने कुछ बुनियादी नियम भी तय किए।