मध्य पूर्व में युद्ध का भारतीय बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
क्या है खबर?
मध्य पूर्व में युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार पर असर पड़ने लगा है। आज (2 मार्च) बाजार खुलने के कुछ देर बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज हुई है। सेंसेक्स करीब 900 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 24,900 के आसपास पहुंच गया। रुपया भी कमजोर होकर 91.23 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया, जो एक महीने का निचला स्तर है। आइए जानते हैं इस युद्ध का बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
तेल की कीमत
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
युद्ध के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। बाजार में आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई प्रभावित हुई तो कीमतें 80 से 90 डॉलर (लगभग 7,200 रुपये से 8,000 रुपये) तक जा सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 55 प्रतिशत कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल और चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है।
महंगाई
महंगाई और रुपये पर दबाव
तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर (लगभग 900 रुपये) प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.5 प्रतिशत बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव और महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका रहती है। ऊंची ईंधन कीमतों का असर परिवहन, हवाई यात्रा और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है। अगर तनाव लंबा चला तो बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
अन्य
किन सेक्टरों पर असर?
इस स्थिति में तेल विपणन कंपनियों और एयरलाइंस पर सबसे ज्यादा दबाव देखा जा सकता है, क्योंकि ईंधन लागत बढ़ती है। वहीं तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को कुछ फायदा हो सकता है। IT कंपनियों को कमजोर रुपये से सीमित लाभ मिल सकता है। मध्य पूर्व भारत के निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा लेता है और यहां से बड़ी मात्रा में रेमिटेंस भी आता है।