बैंक लॉकर में चोरी हो जाए तो कितना मिलेगा मुआवजा? जानें नियम
क्या है खबर?
बैंक लॉकर को लोग ज्वेलरी, जरूरी कागजात और दूसरी कीमती चीजें रखने की सुरक्षित जगह मानते हैं। हालांकि, लॉकर में रखी चीजें चोरी होने पर बैंक हमेशा उनका पूरा पैसा नहीं देता। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, कुछ मामलों में बैंक की जिम्मेदारी तय होती है और मुआवजे की एक सीमा भी होती है। इसलिए लॉकर लेने वाले ग्राहकों के लिए इन नियमों को समझना जरूरी है, ताकि नुकसान होने पर सही जानकारी रहे।
#1
बैंक की जिम्मेदारी कितनी होती है?
RBI के नियमों के अनुसार, चोरी, सेंधमारी, आग, डकैती या बैंक कर्मचारियों की धोखाधड़ी जैसे मामलों में बैंक की जिम्मेदारी बन सकती है।
हालांकि, ग्राहक को मिलने वाला अधिकतम मुआवजा सालाना लॉकर किराए का 100 गुना होता है। उदाहरण के लिए, अगर लॉकर का सालाना किराया 4,000 रुपये है, तो बैंक से अधिकतम 4 लाख रुपये मिल सकते हैं।
सामान की असली कीमत इससे ज्यादा होने पर भी मुआवजा इसी सीमा तक रह सकता है।
#2
हर नुकसान की भरपाई बैंक नहीं करेगा
बैंक हर परिस्थिति में लॉकर में रखी चीजों के नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होता।
RBI के अनुसार, भूकंप, बाढ़, बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की जिम्मेदारी बैंक पर नहीं होती। ग्राहक की अपनी लापरवाही से नुकसान होने पर भी बैंक जिम्मेदार नहीं माना जाता।
हालांकि, बैंक से लॉकर की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम रखने की उम्मीद की जाती है। इसलिए किसी घटना में बैंक की गलती और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है।
#3
कीमती सामान के लिए अलग सुरक्षा जरूरी
लॉकर में महंगी ज्वेलरी या दूसरी कीमती चीजें रखने वाले ग्राहकों को अपने पास उनके रिकॉर्ड जरूर रखने चाहिए।
खरीद की रसीद, फोटो, वैल्यूएशन रिपोर्ट और बीमा के कागजात संभालकर रखना उपयोगी हो सकता है। बैंक लॉकर के अंदर रखे सामान की पूरी सूची नहीं रखता।
अगर सामान की कीमत बैंक की मुआवजा सीमा से ज्यादा है, तो अलग बीमा पर विचार किया जा सकता है। चोरी होने पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना देना भी जरूरी है।