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कच्चे तेल की सप्लाई पर खतरा, भारत के पास अभी कितने दिनों का तेल भंडार?
कच्चे तेल की सप्लाई पर खतरा

कच्चे तेल की सप्लाई पर खतरा, भारत के पास अभी कितने दिनों का तेल भंडार?

Aug 13, 2026
06:19 pm

क्या है खबर?

दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावटों के बीच भारत ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। देश कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में संकट आने पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका मकसद संकट के समय देश में ईंधन की सप्लाई बनाए रखना है।

भंडार

भारत के पास अभी कितना तेल भंडार?

भारत के पास फिलहाल 53.3 लाख मीट्रिक टन रणनीतिक कच्चा तेल भंडारण क्षमता है।

यह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलुरु तथा पादुर में भूमिगत गुफाओं में मौजूद है। सरकार के आकलन के मुताबिक, यह भंडार देश की करीब 9.5 दिनों की कच्चे तेल की जरूरत पूरी कर सकता है।

हालांकि, इसमें सरकारी तेल कंपनियों के वाणिज्यिक भंडार शामिल नहीं हैं। इन्हें जोड़ने पर कुल तेल सुरक्षा करीब 74 दिनों तक पहुंचती है।

योजनाएं

भंडार बढ़ाने के लिए कई योजनाएं तैयार

भारत अब इस क्षमता को बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।

रिजर्व के दूसरे चरण में ओडिशा के चांदीखोल में 40 लाख टन और कर्नाटक के पादुर में 25 लाख टन क्षमता विकसित करने की योजना है। इससे भंडारण करीब 1.18 करोड़ टन हो जाएगा।

इसके अलावा, मंगलुरु, राजस्थान के बीकानेर और मध्य प्रदेश के बीना में नई सुविधाओं की संभावनाएं देखी जा रही हैं। कुछ परियोजनाओं में देरी सामने आई है।

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लक्ष्य

90 दिन के तेल भंडार पर नजर

भारत की तेल जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा होता है, इसलिए सप्लाई बाधा देश के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है।

सरकार 90 दिनों के तेल भंडार अंतरराष्ट्रीय मानक की दिशा में बढ़ना चाहती है। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तेल भंडारण और सप्लाई सुरक्षा पर सहयोग बढ़ रहा है।

रिजर्व बनने से संकट के समय कीमतों और ईंधन उपलब्धता पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

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