कैसे तय होती है क्रेडिट कार्ड की सीमा? जानिए बढ़ाने के लिए क्या करें
क्या है खबर?
डेबिट कार्ड की तरह वर्तमान में क्रेडिट कार्ड का भी उपयोग भी आम हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि, इसमें रिवॉर्ड और कैशबैक जैसे लाभ मिल जाते हैं। यह सिर्फ खर्च करने का साधन ही नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और भरोसे का पैमाना भी बन चुका है। क्रेडिट कार्ड में आप दी गई सीमा से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते। आइए जानते हैं बैंक क्रेडिट सीमा कैसे तय करता है और इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है।
आय
आय भी तय करती है लिमिट
बैक या कोई भी वित्तीय संस्थान क्रेडिट कार्ड सीमा तय करने से पहले कई जरूरी बातों पर गौर करती है। आय और नौकरी की स्थिरता: सबसे पहले देखती है कि आपको हर महीने कितनी सैलरी मिलती है और उसके नौकरी का पेशा कैसा है, क्या वे स्थिर है या नहीं। क्रेडिट स्कोर: यह आपके वित्तीय व्यवहार का आईना है। समय पर भुगतान और कम बकाया रखने से स्कोर अच्छा रहता है। ऐसे ग्राहक को ज्यादा सीमा मिलती है।
खर्च
जिम्मेदारी से खर्चा नहीं करने का भी पड़ता है असर
खर्च करने की आदतें: बैंक आपके लेन-देन पैटर्न को भी देखता है। अगर, आप जिम्मेदारी और ढंग से खर्च करते हैं तो आपको अच्छी सीमा दी जाती है। मौजूदा कर्ज: अगर, पहले से ही आपके ऊपर ज्यादा लोन या EMI का बोझ है तो कार्ड देने वाली संस्था मान सकती है कि आप कार्ड के भारी बिल का भुगतान करने में असमर्थ रहेंगे। इस कारण सीमा कम रखी जाती है।
उपाय
इस तरह से बढ़ा सकते हैं सीमा
सबसे पहले आप क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने के लिए बैंक पर जाकर अनुरोध कर सकते हैं, लेकिन उससे पहले आपको कुछ काम करना होगा। सबसे पहले क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से इस्तेमाल करें। ये कोशिश करें कि आप क्रेडिट कार्ड की सीमा का 30-40 फीसदी ही इस्तेमाल करें। ये दिखाए कि आप पूरी तरह से क्रेडिट कार्ड पर निर्भर नहीं है। अपने क्रेडिट कार्ड बिल या EMI का समय पर भुगतान कर दें।