क्रेडिट कार्ड पर कैसे लगता है ब्याज? जानिए कैसे जेब पर पड़ेगा भारी
क्या है खबर?
क्रेडिट कार्ड एक ऐसी सुविधा है, जो तय सीमा तक खरीदारी और बिलों के भुगतान के लिए उधार पैसा देती है। जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने पर ये सुविधा, धोखाधड़ी से सुरक्षा और रिवार्ड प्रदान करते हैं। कार्ड पर ब्याज-मुक्त अवधि तभी मिलती है, जब कुल बकाया राशि नियत तारीख तक पूरी तरह चुका दी जाती है। थोड़े से बकाया पर भी आपको ब्याज देना पड़ सकता है। आइये जानते हैं क्रेडिट कार्ड पर ब्याज की गणना कैसे की जाती है।
लेट भुगतान
देरी से भुगतान का होगा नुकसान
देरी से भुगतान: अगर, आप नियत तिथि पर या उससे पहले अपने क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने में विफल रहते हैं तो कार्ड जारीकर्ता बकाया राशि पर ब्याज लगाना शुरू कर देगा। न्यूनतम भुगतान: जब आप कार्ड के बिल की पूरी बकाया राशि के बजाय केवल न्यूनतम राशि का भुगतान करते हैं तो बैंक शेष राशि पर ब्याज लगाता है। यह तब तक बढ़ता रहेगा, जब तक आप अपना पूरा बकाया चुका नहीं देते।
नकद निकासी
नकद निकासी बढ़ा देगी बोझ
आंशिक भुगतान: जब आप वास्तविक बिल राशि का एक हिस्सा भुगतान करते हैं तो शेष राशि पर क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरें लागू होती हैं। नकद निकासी: क्रेडिट कार्ड पर तय सीमा के हिसाब से नकद निकासी की सुविधा मिलती है। अगर, आप ATM से नकद निकालने के लिए अपने कार्ड का उपयोग करते हैं तो आपको उस पर ब्याज देना होगा। ऐसे मामलों में ब्याज आमतौर पर सामान्य लेन-देन पर लगने वाले ब्याज से अधिक होता है।
गणना
ऐसे होती है ब्याज की गणना
अगर, कोई कार्डधारक 10,100 रुपये के बिल का भुगतान करने से चूक जाता है तो 2.5 फीसदी के हिसाब से लगभग 252.5 रुपये ब्याज देना होगा। अगर, यूजर अगले बिलिंग चक्र में 20,000 रुपये के नए लेन-देन करता है तो 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाएगा। इससे कुल ब्याज लगभग 752.5 रुपये हो जाएगा, जिसमें ब्याज पर 18 फीसदी GST लगभग 135.45 रुपये अतिरिक्त लगेगा। इससे कुल देर राशि लगभग 20,988 रुपये तक बढ़ सकती है।