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बैंक कैसे तय करते हैं लोन की ब्याज दर? ऐसे करा सकते हैं कम
बैंक हर ग्राहक के लिए अलग-अलग ब्याज दर की पेशकश करती है

बैंक कैसे तय करते हैं लोन की ब्याज दर? ऐसे करा सकते हैं कम

Mar 21, 2026
06:02 pm

क्या है खबर?

अचानक किसी इमरजेंसी में लाखों रुपये की जरूरत पड़ने पर आप किसी दोस्त या रिश्तेदार से लेने के बजाय बैंक से लोन का विकल्प चुनना बेहतर मानते हैं। लोन लेते समय आमतौर पर आपके मन में पहला सवाल होता है कि इस पर ब्याज दर कितनी होगी? जब कोई बैंक के पास लोन लेने जाता है तो उसकी दर प्रत्येक हर एक ग्राहक के लिए एक जैसी नहीं होती है। आइए जानते हैं ब्याज दर कैसे तय होती है।

स्प्रेड रेट 

क्या होती है स्पेड रेट?

बैंक ब्याज दर तय करने के लिए स्प्रेड रेट का सहारा लेते हैं। हर एक ग्राहक से वह अलग-अलग रेट वसूल कर सकते हैं। यह वो अतिरिक्त ब्याज (मार्जिन) है, जो बैंक अपनी तय लोन दर (बेस रेट) के ऊपर जोड़ता है। इसी से अंतिम ब्याज दर और EMI तय होती है। अगर, किसी बैंक की बेस रेट 7 प्रतिशत है और वह आपसे 2 फीसदी स्प्रेड लेता है तो आपको कुल 9 फीसदी ब्याज देना होगा।

फैक्टर 

कैसे तय होती है स्प्रेड रेट?

बैंक कई फैक्टर्स के आधार पर स्प्रेड रेट तय करते हैं। इसमें क्रेडिट स्कोर और पुनर्भुगतान रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है। अगर, आय स्थिर है और पहले लिए सभी लोन समय पर चुकाए हैं तो बैंक कम स्प्रेड रेट ऑफर कर सकता है। इसके अलावा, लोन का प्रकार भी मायने रखता है। सिक्योर्ड लोन (होम लोन) पर स्प्रेड कम होता है, जबकि बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन पर ज्यादा रिस्क कवर करने के लिए स्प्रेड रेट बढ़ा देते हैं।

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ब्याज दर 

ब्याज दर पर क्या पड़ता है असर?

स्प्रेड रेट कम होने का मतलब यह नहीं है कि ब्याज दर भी कम होगी। अगर, किसी बैंक का बेस रेट ही ज्यादा है तो स्प्रेड कम होने पर भी कुल ब्याज दर ज्यादा हो सकती है। दूसरी तरफ, कम बेस रेट और थोड़ा ज्यादा स्प्रेड होने पर भी कुल ब्याज दर कम हो सकता है। इसके अलावा, प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, प्री-पेमेंट पेनल्टी और फ्लोटिंग रेट की शर्तें भी टोटल स्प्रेड रेट को प्रभावित करती हैं।

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तरीके 

इन तरीकों से कम करें स्प्रेड रेट

कुछ ब्याज दर पर स्प्रेड रेट का काफी असर पड़ता है। इसे कम करने में वित्तीय प्रोफाइल को मजबूत बनाना है। इसके लिए क्रेडिट स्कोर को 750 से अधिक रखें, क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरें, लोन EMI समय पर भरें। काेई भी किस्त चूकने न दें और देरी से भुगतान न करें, क्रेडिट लिमिट का ज्यादा इस्तेमाल न करें और क्रेडिट हिस्ट्री को लंबा रखें। सरकारी बैंक से सैलरी अकाउंट पर लोन लेना सस्ती स्प्रेड रेट दिला सकता है।

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