होम लोन ट्रांसफर से कैसे कर सकते हैं बड़ी बचत? जानिए कब ऐसा करना सही
क्या है खबर?
अधिकांश लोग होम लोन लेने के बाद अगले 15 या 20 सालों तक हर महीने EMI का भुगतान करते रहते हैं। इस कारण उन्हें भारी ब्याज चुकाना पड़ता है। बैंक बाजार की स्थिति के अनुसार अपने होम लोन की दरों में बदलाव करते रहते हैं। आप बैलेंस ट्रांसफर की मदद से अपने मौजूदा लोन को दूसरे बैंक में कम ब्याज दर पर स्थानांतरित कर सकते हैं। आइये जानते हैं बैलेंस ट्रांसफर से कैसे बचत कर सकते हैं।
ब्याज
ब्याज दर में इतना अंतर हो तो ले यह निर्णय
लोन ट्रांसफर के बारे में सोचने से पहले अपने मौजूदा लोन पर ब्याज दर की जांच कर लें। फिर, यह देखें कि दूसरे बैंक क्या ऑफर कर रहे हैं। आपकी मौजूदा और नई ब्याज दर में लगभग 0.5 प्रतिशत या उससे अधिक का अंतर है तो इस पर और विचार करना फायदेमंद हो सकता है। लंबी अवधि में यह अंतर लोन पर दिए जाने वाले ब्याज को कई लाख रुपये तक कम कर सकता है।
तुलना
ब्याज दर और शुल्क में करें तुलना
बैंक बदलना पूरी तरह से फ्री नहीं होता है। नया बैंक प्रोसेसिंग शुल्क ले सकता है और इसमें कानूनी या प्रशासनिक शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। कम ब्याज दर से होने वाली कुल बचत की तुलना लोन ट्रांसफर की लागत से करें। सामान्य तौर पर जब लोन अवधि ज्यादा बची हो तो यह निर्णय लेना अधिक समझदारी भरा होता है। अगर, आप लोन चुकाने के करीब हैं तो लाभ कम हो सकता है।
बेतहर डील
मिल सकती है बेहतर डील
जब आप बैलेंस ट्रांसफर के लिए आवेदन करते हैं तो नया बैंक आपके पुनर्भुगतान के पिछले रिकॉर्ड को देखेगा। अगर, आप समय पर अपनी EMI का भुगतान कर रहे हैं तो स्वीकृति मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। अच्छा क्रेडिट स्कोर बेहतर शर्तों पर बातचीत करने में भी सहायक हो सकता है। जिन लोगों ने वर्षों पहले लोन लिया था, वे अब बेहतर ब्याज दरों के लिए पात्र हो सकते हैं, क्योंकि उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।
फायदा
नई ब्याज दर पर नई बैंक में शुरू होगा लोन
नया बैंक चुनने के बाद आपको मौजूदा लोन का विवरण, पहचान पत्र और संपत्ति के दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। मंजूरी के बाद वह आपके मौजूदा ऋणदाता को बकाया राशि का भुगतान कर देता है। इसके बाद लोन संशोधित ब्याज दर पर नए बैंक में जारी रहता है। ब्याज दर कम होने पर आपके पास EMI कम करने या लोन अवधि कम करने का विकल्प होता है। दूसरा विकल्प चुनना फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे ब्याज पर अधिक बचत होगी।