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कैसे AI के कारण भी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया हो रहा है कमजोर?
रुपये में गिरावट के पीछे AI भी वजह

कैसे AI के कारण भी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया हो रहा है कमजोर?

May 18, 2026
07:39 pm

क्या है खबर?

भारतीय रुपये में गिरावट लगातार जारी है और सोमवार को यह डॉलर के मुकाबले 96.39 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। 2026 में अब तक रुपया करीब 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया तनाव के अलावा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी रुपये पर असर डाल रहा है। AI तकनीक से जुड़े बड़े निवेश और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण भारतीय करेंसी पर दबाव बढ़ रहा है।

मांग

AI तकनीक से बढ़ रही डॉलर की मांग

AI सिस्टम चलाने के लिए महंगे चिप्स, सर्वर, क्लाउड सिस्टम और डेटा सेंटर की जरूरत होती है। भारत समेत कई देश यह तकनीक अमेरिका और दूसरे देशों से खरीद रहे हैं। इन उपकरणों के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जैसे-जैसे AI सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डॉलर की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है। डॉलर मजबूत होने से रुपये की कीमत लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है।

निवेश

विदेशी निवेश भी अमेरिका की ओर बढ़ा

AI सेक्टर में अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। इसी वजह से दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान अमेरिकी बाजारों की ओर ज्यादा बढ़ रहा है। कई विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी AI कंपनियों में लगा रहे हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ रहा है। विदेशी निवेश कम होने से बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कमजोर होती चली जाती है।

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चुनौती

आगे और बढ़ सकती है चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI तकनीक का विस्तार और तेज होगा। भारत को भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डाटा सेंटर और नई तकनीकों पर बड़ा खर्च करना पड़ सकता है। अगर आयात लगातार बढ़ते रहे और विदेशी निवेश कमजोर रहा, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर भारत खुद AI तकनीक और चिप निर्माण में मजबूत बनता है, तो भविष्य में रुपये को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

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