प्राइवेट बसों के लिए 20,000 करोड़ रुपये तक की EV इंसेंटिव स्कीम ला सकती है सरकार
क्या है खबर?
केंद्र सरकार अब प्राइवेट बस ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक बसें अपनाने के लिए नई योजना तैयार कर रही है। इसका मकसद इलेक्ट्रिक बस खरीदने का खर्च और जोखिम कम करना है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती प्रस्ताव के तहत अगले पांच साल में करीब 20,000 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इस योजना की अवधि और बढ़ाई जा सकती है। इससे देश में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को तेजी से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फायदे
प्राइवेट ऑपरेटरों को मिलेंगे नए फायदे
नई योजना के तहत प्राइवेट बस ऑपरेटरों को आसान लोन, ब्याज में राहत और दूसरी वित्तीय मदद देने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, कुछ प्रशासनिक सुविधाएं भी दी जाएंगी ताकि इलेक्ट्रिक बसों को अपनाना आसान हो सके। अभी तक ज्यादातर सरकारी मदद राज्य सड़क परिवहन निगमों को मिलती थी, लेकिन अब पहली बार निजी बस ऑपरेटरों को भी सीधे इस तरह का लाभ देने की तैयारी की जा रही है।
संख्या
87 फीसदी बसें निजी क्षेत्र के पास
देश में करीब 87 फीसदी बसें निजी ऑपरेटर चलाते हैं, जबकि केवल 13 फीसदी बसें राज्य सड़क परिवहन उपक्रमों के पास हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब निजी कंपनियां भी बड़ी संख्या में इसमें शामिल हों। वर्तमान चार्जिंग स्टेशन के लिए अलग सरकारी योजनाएं पहले से मौजूद हैं, इसलिए नई योजना का फोकस मुख्य रूप से बस खरीद और वित्तीय सहायता पर रहेगा।
चुनौती
महंगी ई-बसें बनी बड़ी चुनौती
इलेक्ट्रिक बसों की कीमत सामान्य डीजल या CNG बसों से करीब दो से तीन गुना ज्यादा होती है। इसी वजह से छोटे ऑपरेटरों को लोन लेने और अधिक निवेश करने में परेशानी होती है। सरकार इस चुनौती को कम करने के लिए नई वित्तीय व्यवस्था पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य सस्ती फाइनेंसिंग उपलब्ध कराना, जोखिम घटाना और देश में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या तेजी से बढ़ाने में मदद करना है।