भारत में सोने की तस्करी में 1,500 प्रतिशत का उछाल, क्या है वजह?
क्या है खबर?
भारत में सोने के गैरकानूनी आयात में इस साल जुलाई से सितंबर के बीच भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्लूमबर्ग ने वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के हवाले से बताया कि इस दौरान अवैध आयात 1500 प्रतिशत बढ़कर 3 टन से 50 मीट्रिक टन हो गया। यह 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अपनी मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है।
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आयात शुल्क बढ़ने से तस्करी को मिला बढ़ावा
सोने की तस्करी बढ़ने की एक बड़ी वजह आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी मानी जा रही है।
मई, 2026 में सरकार ने सोने और चांदी पर आयात कर 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। इसमें 10 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क और 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना विकास उपकर शामिल है।
इसके अलावा, सोने पर 3 प्रतिशत एकीकृत GST भी लगता है। महंगा आयात होने से शुल्क बचाकर सोना लाने के रास्ते आकर्षक हुए हैं।
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तस्करी के लिए अपनाए जा रहे हैं अलग-अलग तरीके
सरकारी शुल्क से बचने के लिए सोना कई गैरकानूनी रास्तों से देश में लाया जा रहा है।
इसमें तस्करी के अलावा यात्रियों के सामान के जरिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सोना लाना भी शामिल है। पहले भी जब शुल्क बढ़ा था, तब ऐसे तरीकों का इस्तेमाल बढ़ा था।
मई में हुई नई बढ़ोतरी के बाद एक बार फिर अवैध कारोबार को फायदा पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाने के लिए शुल्क बढ़ाया था।
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महंगे सोने से गहनों की मांग में भी गिरावट
सोने की ऊंची कीमतों का असर खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सितंबर तिमाही में भारत में सोने के गहनों की मांग पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत घट गई। इस साल अब तक इसमें 18 प्रतिशत की कमी आई है।
लोग अब हल्के और कम कैरेट वाले गहने पसंद कर रहे हैं। सोने के सिक्कों और बार की मांग 40 प्रतिशत गिरकर 55 टन रह गई, जबकि गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा है।