रियल एस्टेट में AI के इस्तेमाल से होगा 1,500 अरब रुपये से ज्यादा का फायदा
भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बदौलत और भी स्मार्ट होता जा रहा है। इसकी शुरुआत भले ही वर्चुअल टूर्स और चैटबॉट्स से हुई थी, लेकिन अब इसका इस्तेमाल बड़े और गंभीर कामों में होने लगा है।
वर्तमान में डेवलपर्स इसका उपयोग प्लानिंग, लागत का अनुमान लगाने और जोखिमों को पहले ही भांपने के लिए कर रहे हैं।
ईवाई-पार्थेनॉन और क्रेडाई (CREDAI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनरेटिव AI अकेले ही अगले 7 सालों में इस सेक्टर के फायदे में 14 से 17 अरब डॉलर (करीब 1,300-1,600 अरब रुपये) तक का इजाफा कर सकता है।
मैनुअल रिपोर्टिंग का काम करता है कम
AI अब प्रोजेक्ट्स को तेजी से और कम गलतियों के साथ पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। पावरप्ले और इंकर्स टेक्नोलॉजीज जैसे टूल्स मैनुअल रिपोर्टिंग को 40 फीसदी तक घटा देते हैं और प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा को 5 से 10 फीसदी तक बढ़ा देते हैं।
हालांकि, अभी केवल 15-20 फीसदी बड़े डेवलपर्स ही अपने चालू प्रोजेक्ट्स में AI का पूरी तरह से उपयोग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही यह एक आम बात हो जाएगी क्योंकि अनुमान है कि 2047 तक यह सेक्टर 5,800 अरब डॉलर (करीब 5.5 लाख अरब रुपये) का उद्योग बन जाएगा।