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मानसून और ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने का डर, वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा
वित्त मंत्रालय ने मानसून और ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई दर बढ़ने का डर जताया

मानसून और ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने का डर, वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा

लेखन गजेंद्र
May 30, 2026
04:47 pm

क्या है खबर?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और सामान्य से कम मानसूनी बारिश ने भारतीय अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और मानसून पर अल नीनो का असर भारत में खुदरा मुद्रास्फीति पर दिख सकता है। मंत्रालय ने कहा कि आर्थिक स्थिति में 'सतर्कतापूर्ण लचीलापन' दिखता है, लेकिन मौजूदा अनिश्चितता से निपटने के लिए मुद्रास्फीति के घटनाक्रमों पर सतर्कता बरतनी होगी।

चिंता

उपभोग मांग में दिखेगी चुनौती

मंत्रालय ने मई की अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा, "भारत के लिए ये बाहरी दबाव चुनिंदा, लेकिन साफतौर पर घरेलू आर्थिक परिस्थितियों में दिखने लगे हैं।" रिपोर्ट में कहा गया कि कोर सेक्टर की वृद्धि और ईंधन की खपत में आई नरमी संकेत है कि वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियां धीरे-धीरे घरेलू गतिविधियों के चुनिंदा क्षेत्रों पर असर डाल रही हैं। मानसून और आर्थिक गतिविधियों में मंदी को देखते हुए आगे समग्र उपभोग मांग को भी चुनौती झेलनी पड़ेगी।

रिपोर्ट

मंत्रालय ने रिपोर्ट में क्या चिंता जताई?

रिपोर्ट में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की अवधि भारत के बाहरी और मूल्य दृष्टिकोण के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। ईंधन कीमतों से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में परिवहन, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों से संबंधित लागतों में वृद्धि से खुदरा महंगाई दर पर असर पड़ेगा। भारी वर्षा की कमी और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, जिससे ग्रामीण मांग कमजोर हो सकती है।

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दर

खुदरा और थोक महंगाई दर बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अप्रैल में वार्षिक खुदरा महंगाई दर मामूली रूप से बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो केंद्रीय बैंक के लक्ष्य 5 प्रतिशत से नीचे है। थोक महंगाई दर 8.3 प्रतिशत है। खुदरा और थोक महंंगाई के बीच अंतर संकेत है कि लागत पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खुदरा मुद्रास्फीति 2026-27 में औसतन 4.6 प्रतिशत रहेगी।

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जोखिम

RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के अर्थशास्त्रियों ने बताया कि RBI जून-अगस्त की मौद्रिक नीति समिति की बैठकों में रेपो दर में 50 बेसिस प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। उनके मुताबिक, अगर, वस्तुओं की कीमतों में निरंतर दबाव और कमजोर रुपये के कारण मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक रहती है तो 2026-27 में 25-50 बेसिस प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि का जोखिम है। भारत के 8 प्रमुख उद्योगों कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट, बिजली की वृद्धिदर घटी है।

जानकारी

इस बार मानसून पर संकट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को अपने अप्रैल में अनुमानित पहले के मानसून पूर्वानुमान 92 प्रतिशत को घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है। इसका कारण अल नीनो है, जिससे बारिश कम होगी।

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