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H-1B वीजा शुल्क पर कोर्ट की रोक भारतीयों के लिए क्यों है बड़ी राहत?
H-1B वीजा शुल्क पर कोर्ट की रोक

H-1B वीजा शुल्क पर कोर्ट की रोक भारतीयों के लिए क्यों है बड़ी राहत?

Jun 09, 2026
12:48 pm

क्या है खबर?

अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए राहत भरी खबर है। अमेरिका की एक फेडरल अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना पर रोक लगा दी है, जिसमें H-1B वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने वाली कंपनियों से 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपये) की फीस लेने का प्रस्ताव था। यह फैसला भारतीयों के लिए खास है, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीयों की होती है।

राहत

भारतीयों के हित में क्यों है यह फैसला?

अगर 1 लाख डॉलर की फीस लागू हो जाती, तो कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना काफी महंगा हो जाता। इससे कई कंपनियां H-1B वीजा पर भर्ती कम कर सकती थीं। अदालत के फैसले से यह अतिरिक्त बोझ फिलहाल टल गया है। इसका फायदा भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और अन्य कुशल पेशेवरों को मिलेगा। इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियां भी पहले की तरह विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करने में अधिक सहज रह सकेंगी।

कार्यक्रम

क्या है H-1B वीजा कार्यक्रम?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नौकरी देने की अनुमति देता है। इसके लिए आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री जरूरी होती है। अमेरिका हर साल 65,000 H-1B वीजा जारी करता है, जबकि उच्च डिग्री धारकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध होते हैं। तकनीक और शोध से जुड़े कई क्षेत्र इस कार्यक्रम पर निर्भर हैं, इसलिए इसमें होने वाले किसी भी बदलाव का असर हजारों भारतीय पेशेवरों पर पड़ता है।

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चुनौतियां

आगे भी बनी रह सकती हैं चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत के फैसले से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन भविष्य में प्रशासन अन्य प्रक्रियात्मक बदलावों के जरिए H-1B वीजा धारकों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। कुछ अन्य जानकारों का मानना है कि यह फैसला सकारात्मक है, लेकिन यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि विवाद पूरी तरह खत्म हो गया है। फिर भी, वर्तमान निर्णय भारतीय पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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