ITR में भूलकर भी न करें ये गलतियां, नहीं तो आ सकता है नोटिस
क्या है खबर?
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय नजदीक आते ही करदाताओं के लिए सावधानी और जरूरी हो जाती है। छोटी-सी गलती भी रिफंड में देरी, ज्यादा टैक्स या विभाग से नोटिस की वजह बन सकती है। जानकार सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 26AS, AIS और पहले से भरे डाटा को अच्छे से मिला लें। इससे गड़बड़ी कम होती है और रिटर्न सही तरीके से जमा करने में आसानी रहती है।
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गलत फॉर्म और अधूरी इनकम की भूल
ITR भरते समय सही फॉर्म चुनना बहुत जरूरी है। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न अटक सकता है और प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। कई लोग ब्याज, किराया, फ्रीलांस या डिविडेंड जैसी दूसरी कमाई बताना भूल जाते हैं। इससे इनकम कम दिखती है और आगे परेशानी हो सकती है। फॉर्म 16, AIS और 26AS में अगर जानकारी अलग हो, तब भी आयकर विभाग की तरफ से नोटिस आ सकता है।
#2
डिडक्शन और टैक्स सिस्टम में गलती पड़ सकती है भारी
कई बार लोग ऐसे डिडक्शन का दावा कर देते हैं, जिनके लिए वे पात्र नहीं होते, वहीं कुछ लोग जरूरी छूट लेना भूल जाते हैं। इससे टैक्स ज्यादा भी लग सकता है। शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से जुड़े कैपिटल गेन गलत भरने पर भी दिक्कत आती है। इसके अलावा, पुराने और नए टैक्स सिस्टम की सही तुलना किए बिना विकल्प चुनने से भी टैक्स का बोझ बढ़ सकता है।
#3
ई-वेरिफिकेशन और बैंक डिटेल जरूर जांचें
रिटर्न भरने के बाद तय समय में ई-वेरिफिकेशन करना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है। बैंक अकाउंट की गलत जानकारी देने पर रिफंड आने में देरी हो सकती है। अगर, रिटर्न जमा करने के बाद कोई गलती समझ में आए तो समय रहते रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय पहले ही जांच कर लेना बेहतर रहता है।