सूरजमुखी तेल की सप्लाई में दिक्कत, भारत ने दूसरे खाद्य तेलों का बढ़ाया आयात
क्या है खबर?
वैश्विक चुनौतियों के कारण सूरजमुखी तेल की शिपमेंट अपने तय समय से देरी का सामना कर रही है। काला सागर क्षेत्र में बढ़ते हमलों की वजह से रूस और यूक्रेन से आने वाली खेप समय पर नहीं पहुंच पा रही है। व्यापारियों के अनुसार कई शिपमेंट 60 दिन तक देर से पहुंच रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे खरीदारों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है।
कदम
भारत ने बढ़ाई दूसरे खाद्य तेलों की खरीद
भारत ने सप्लाई में आई इस रुकावट को देखते हुए अब दूसरे खाद्य तेलों का आयात बढ़ा दिया है।
कंपनियां अर्जेंटीना और दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों से सूरजमुखी तेल मंगा रही हैं। साथ ही पाम ऑयल, सोया ऑयल और कैनोला ऑयल की खरीद भी बढ़ाई जा रही है।
साल की पहली छमाही में भारत के कुल वनस्पति तेल आयात में सूरजमुखी तेल की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रही, जिसमें करीब 10 लाख टन ब्लैक सी क्षेत्र से आया।
चिंता
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता
अगले महीने से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
ऐसे में कंपनियां पहले से ही पर्याप्त भंडार जुटाने में लगी हैं। इस महीने भारत में सूरजमुखी तेल का स्थानीय मूल्य सूचकांक करीब 6 फीसदी बढ़ चुका है।
वहीं जुलाई में पाम ऑयल का आयात करीब 40 फीसदी बढ़कर 7 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है, जिससे बाजार में उपलब्धता बेहतर बनाए रखने की कोशिश होगी।
मुश्किल
कमजोर मानसून से बढ़ सकती है मुश्किल
देश में सामान्य से कम बारिश के कारण तिलहन फसलों की बुआई भी प्रभावित हुई है, जिससे घरेलू उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, पिछले सीजन में रूस और यूक्रेन ने मिलकर दुनिया के 63 फीसदी सूरजमुखी तेल निर्यात की आपूर्ति की थी।
ऐसे में यदि सप्लाई बाधित रही तो भारत की आयात पर निर्भरता और खाद्य तेलों की कीमतें दोनों बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।