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दो दशकों के निचले स्तर पर हीरे की कीमत, क्या है गिरावट की वजह?
दो दशकों के निचले स्तर पर हीरे की कीमत

दो दशकों के निचले स्तर पर हीरे की कीमत, क्या है गिरावट की वजह?

Sep 23, 2026
12:48 pm

क्या है खबर?

नेचुरल हीरे की कीमतें दो दशकों से ज्यादा समय में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। ट्रेडिंगव्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, थोक बाजार में नेचुरल हीरे की कीमतें 2021 के मुकाबले करीब 30 से 40 प्रतिशत नीचे हैं। हालांकि, इसका सीधा फायदा भारतीय ग्राहकों को हीरे की अंगूठी या हार खरीदते समय पूरी तरह नहीं मिल सकता। तैयार गहनों की कीमत सिर्फ हीरे से तय नहीं होती, बल्कि सोने और दूसरी लागत भी इसमें शामिल होती है।

वजह

कीमतों में गिरावट की क्या है वजह?

हीरे की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह मांग में कमी, बढ़ता स्टॉक और लैब में बने सस्ते हीरे हैं।

अग्रणी हीरा कंपनी डी बीयर्स के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में उसके कच्चे हीरे की औसत कीमत सालाना आधार पर 32 प्रतिशत गिरकर 105 डॉलर प्रति कैरेट रह गई। छोटे और कम गुणवत्ता वाले नेचुरल हीरों पर लैब में बने हीरों का दबाव ज्यादा है।

इससे इस श्रेणी में कीमतें लगातार नीचे आई हैं।

फायदा

भारतीय ग्राहकों को क्यों नहीं मिलेगा पूरा फायदा?

भारतीय ग्राहकों के लिए हीरा सस्ता होने के बावजूद गहनों की कीमत में उतनी गिरावट जरूरी नहीं है।

इसकी वजह सोने की ऊंची कीमत और गहने बनाने का खर्च है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में सोने की कीमत एक साल पहले की तुलना में 59 प्रतिशत ज्यादा थी।

गहनों के बिल में हीरे के अलावा सोना, प्लैटिनम, डिजाइन, बनाने का खर्च और दूसरी लागत भी शामिल होती है।

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असर

भारत के हीरे के कारोबार पर भी असर

लैब में बने हीरों ने बाजार में कीमतों पर काफी दबाव बढ़ाया है।

भारत दुनिया के ज्यादातर कच्चे हीरों को काटने और पॉलिश करने वाला प्रमुख केंद्र है, इसलिए इस बदलाव का असर यहां के कारोबार पर भी पड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कटे और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात 8.52 प्रतिशत घटकर 12.16 अरब डॉलर रहा।

हालांकि, बड़े और अच्छी गुणवत्ता वाले हीरों की मांग मजबूत बनी हुई है।

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