EV सेक्टर में बढ़ेगी नौकरियों की मांग, 2030 तक 4 करोड़ रोजगार का अनुमान
क्या है खबर?
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बढ़ता चलन अब सिर्फ गाड़ियां बदलने तक सीमित नहीं है। इसके साथ बैटरी बनाने, चार्जिंग स्टेशन लगाने, वाहन सर्विसिंग, सॉफ्टवेयर और बैटरी रीसाइक्लिंग जैसे नए काम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। एडेको इंडिया के अनुमान के मुताबिक, भारत का EV क्षेत्र 2030 तक 3 से 4 करोड़ नौकरियां पैदा कर सकता है। इनमें बड़ी संख्या अप्रत्यक्ष रोजगार की होगी, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे।
नौकरियां
EV फैक्ट्रियों के बाहर भी मिलेंगी नौकरियां
EV क्षेत्र में बनने वाली नौकरियों में सिर्फ वाहन कारखानों का हिस्सा नहीं होगा।
एडेको इंडिया के अनुसार, कुल रोजगार में करीब 10 से 15 प्रतिशत सीधे और 85 से 90 प्रतिशत अप्रत्यक्ष हो सकते हैं। मैन्युफैक्चरिंग फिर भी सबसे बड़ा रोजगार क्षेत्र रहेगा, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 50 से 55 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
इसके अलावा बैटरी, चार्जिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, सॉफ्टवेयर, टेलीमैटिक्स और सर्विसिंग में भी बड़ी संख्या में नौकरियां बनेंगी।
चार्जिंग नेटवर्क
चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने से रोजगार बढ़ेगा
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या इस रोजगार बदलाव को गति दे रही है।
जुलाई, 2026 तक प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत 2025-26 में 12.6 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन दर्ज हुए थे।
दिल्ली की EV नीति में 30,000 चार्जिंग पॉइंट बनाने की योजना है। हर चार्जिंग केंद्र को स्थापना और रखरखाव के लिए कर्मचारियों की जरूरत होगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, EV कौशल वाले कर्मचारियों को बेहतर वेतन भी मिल सकता है।
फायदा
नए कौशल सीखने वालों को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि EV उद्योग में रोजगार पाने के लिए नए कौशल सीखना जरूरी होगा।
बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, चार्जिंग सिस्टम और कनेक्टेड मोबिलिटी की समझ रखने वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी।
एडेको इंडिया के अनुसार, नई भर्तियों में करीब 40 से 50 प्रतिशत शुरुआत में कॉन्ट्रैक्ट या फ्लेक्सी स्टाफिंग के जरिए हो सकती हैं। समय के साथ इनमें स्थायी भूमिकाओं में बदल सकती हैं और रोजगार बाजार तैयार कर सकती हैं।