टैरिफ और वीजा चिंताओं के बीच ट्रंप दावोस 2026 में बड़े भारतीय CEO से मिलेंगे
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप छह साल के अंतराल के बाद विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 में हिस्सा लेने जा रहे हैं। स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली इस बैठक में वह कीनोट भाषण देंगे और एक खास रिसेप्शन भी होस्ट करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत के कई बड़े बिजनेस लीडर्स के शामिल होने की उम्मीद है। ट्रंप का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर तनाव बना हुआ है।
बयान
ट्रंप का बयान और मौजूदा माहौल
दावोस रवाना होने से पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह एक खूबसूरत जगह जा रहे हैं, जहां लोग उनका इंतजार कर रहे होंगे। हालांकि, उनका यह दौरा ग्रीनलैंड से जुड़े विवाद, यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकियों और NATO सहयोगियों के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच हो रहा है। इन मुद्दों की वजह से ट्रंप की मौजूदगी को लेकर वैश्विक स्तर पर खास दिलचस्पी देखी जा रही है।
भारतीय लीडर्स
रिसेप्शन में शामिल होने वाले भारतीय बिजनेस लीडर्स
ट्रंप के रिसेप्शन में भारत के कई दिग्गज उद्योगपति शामिल हो सकते हैं। दिग्गज उद्योगपतियों की सूची में टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन, महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अनीश शाह, इंफोसिस के CEO सलिल एस. पारेख, विप्रो के CEO श्रीनि पल्लिया, भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, बजाज फिनसर्व के चेयरमैन संजीव बजाज और जुबिलेंट भरतिया ग्रुप के संस्थापक हरि एस. भरतिया के नाम शामिल हैं।
अन्य चेहरे
दावोस में मौजूद अन्य भारतीय चेहरे
दावोस 2026 में कई अन्य प्रमुख भारतीय लीडर्स की भी मौजूदगी रहेगी। इन लीडर्स की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, TVS मोटर के CEO सुदर्शन वेणु, इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी, जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ, विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी, पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा और रीन्यू के CEO सुमंत सिन्हा शामिल हैं। भारत की मजबूत भागीदारी इस समिट में साफ दिखाई दे रही है।
एजेंडा
व्यापार, वीजा और वैश्विक एजेंडा
यह बैठक भारतीय निर्यातकों के लिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि वे अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही, H-1B वीजा नियमों में हुए हालिया बदलावों को लेकर भी चिंता बनी हुई है, जिसका असर IT सेक्टर पर पड़ सकता है। 19 से 23 जनवरी तक चलने वाली इस बैठक में फ्रांस, यूरोपीय संघ और यूक्रेन समेत कई देशों के शीर्ष नेता भी हिस्सा ले रहे हैं।