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कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार, भारत के लिए बढ़ीं चिंताएं
कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर के पार

कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार, भारत के लिए बढ़ीं चिंताएं

Jul 30, 2026
03:57 pm

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर तेज हो गई हैं। आज (30 जुलाई) ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 92.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वैश्विक हालात बिगड़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ी है और आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

आयात बिल

भारत के आयात बिल पर बढ़ सकता है दबाव

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है, इसलिए कीमतों में तेजी का सीधा असर देश पर पड़ सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ सकता है।

देश का सालाना तेल आयात बिल 120 अरब डॉलर (लगभग 11,500 अरब रुपये) का है, जिससे सरकारी खर्च और विदेशी मुद्रा पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

महंगाई

महंगाई और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है असर

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार, अप्रैल से जून के दौरान भारत का कच्चा तेल आयात बिल 49.8 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 61 फीसदी अधिक है।

इसी बीच जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.3 फीसदी पहुंच गई।

अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो पेट्रोल, डीजल और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका बढ़ेगी।

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चुनौती

रूस से तेल खरीद पर भी बढ़ सकती है चुनौती

भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रूस से खरीदता है।

वहीं अमेरिका में प्रस्तावित नया कानून रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने की बात करता है। अगर यह लागू होता है तो भारत के लिए तेल खरीदना और महंगा हो सकता है।

ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी होने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर आने वाले समय में दिख सकता है।

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