अमेरिकी अदालत का जोहो के सह-संस्थापक पर बड़ा फैसला, तलाक मामले में जमा करना होगा बॉन्ड
क्या है खबर?
अमेरिका की एक अदालत ने जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू के खिलाफ फैसला सुनाया है। कैलिफोर्निया कोर्ट ने तलाक से जुड़े मामले में उन्हें 1.7 अरब डॉलर (लगभग 150 अरब रुपये) का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। यह फैसला उनकी पूर्व पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन की याचिका पर आया है। कोर्ट को आशंका है कि संपत्तियों के ट्रांसफर से श्रीनिवासन को नुकसान हो सकता है। इस फैसले से जोहो से जुड़ा निजी मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।
मामला
तलाक केस में कोर्ट ने क्यों लिया सख्त रुख?
न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला लगभग तीन दशक पुरानी शादी के दौरान बनी साझा संपत्तियों से जुड़ा है। कोर्ट का मकसद इन कम्युनिटी एसेट्स को सुरक्षित रखना है। आरोप है कि संपत्तियों के बंटवारे से पहले कुछ ट्रांसफर किए गए। श्रीधर ने इस आदेश का पूरा पालन अभी तक नहीं किया है। इसी वजह से कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जोहो के ओनरशिप स्ट्रक्चर की भी जांच शुरू कर दी है।
संपत्ति
रिसीवर की नियुक्ति और संपत्ति पर रोक
अदालत ने काइल एवरेट नाम के रिसीवर को नियुक्त किया है। यह रिसीवर जोहो से जुड़ी कई कंपनियों और श्रीधर की निजी संपत्तियों की निगरानी करेगा। कोर्ट ने एक बड़े एसेट ट्रांसफर पर रोक भी लगा दी है। जजों ने वेम्बू के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने इसे टैक्स से जुड़ा कदम बताया था। कोर्ट का कहना है कि यह आदेश शादी की संपत्ति की सुरक्षा के लिए जरूरी था।
आरोप
मालिकाना हक के आरोप और जोहो पर असर
प्रमिला का आरोप है कि जोहो के बड़े शेयर परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर किए गए। वहीं, वेम्बू इन आरोपों से इनकार करते हैं। कोर्ट ने वित्तीय पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है। यह मामला जोहो जैसी बड़ी टेक कंपनी के लिए भी अहम है, क्योंकि इससे कंपनी की मालिकाना संरचना और भविष्य की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कानूनी प्रक्रिया का असर ऑपरेशनल फैसलों पर भी पड़ सकता है।