कॉपर की कीमत ने तोड़ा रिकॉर्ड, करीब 14 लाख रुपये प्रति टन पहुंचा भाव
क्या है खबर?
कॉपर की कीमत में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर तीन महीने के कॉपर फ्यूचर्स 0.8 प्रतिशत बढ़कर 14,533 डॉलर (करीब 14 लाख रुपये) प्रति टन तक पहुंच गए। यह जनवरी में बने पुराने रिकॉर्ड से ज्यादा है। इस साल अब तक कॉपर करीब 17 प्रतिशत महंगा हो चुका है। पिछले 12 महीनों में इसकी कीमत लगभग 47 प्रतिशत बढ़ी है। बाजार में अमेरिकी टैरिफ को लेकर भी हलचल है।
वजह
अमेरिका के टैरिफ से बढ़ी कीमत
कॉपर महंगा होने की एक प्रमुख वजह अमेरिका में इसके आयात पर संभावित टैरिफ को माना जा रहा है।
बाजार में चर्चा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रिफाइंड कॉपर के आयात पर शुल्क बढ़ा सकते हैं। इसी आशंका के चलते ट्रेडर्स ने बड़ी मात्रा में कॉपर अमेरिका भेजा।
वहां ज्यादा कीमत मिलने की उम्मीद में की गई इस खरीद से अमेरिकी स्टॉक बढ़ गया। दूसरी तरफ, लंदन के बाजार में उपलब्ध कॉपर की मात्रा घट गई।
मांग
सप्लाई कम, मांग लगातार बढ़ी
कॉपर की कीमत बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह सप्लाई और मांग के बीच बढ़ता अंतर है।
डाटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी और बिजली के ग्रिड में कॉपर की जरूरत लगातार बढ़ रही है। वहीं, पुरानी खदानों से उत्पादन बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। इस साल कई बड़ी खदानों को उत्पादन से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चिली से अगस्त में कॉपर एक्सपोर्ट रेवेन्यू भी एक साल से ज्यादा समय में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।
अन्य
माइनिंग कंपनियों को फायदा
कॉपर की ऊंची कीमतों का फायदा दुनिया की बड़ी माइनिंग कंपनियों को मिल रहा है।
रियो टिंटो, BHP, ग्लेनकोर और जिजिन माइनिंग जैसी कंपनियों ने कॉपर कारोबार में बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, महंगा कॉपर आगे चलकर खरीदारों की परेशानी बढ़ा सकता है और वे दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं।
जानकारों का कहना है कि मांग मजबूत रहने और सप्लाई पर दबाव बने रहने से कॉपर की कीमतों को ऊंचे स्तर पर सहारा मिल सकता है।