बिलडेस्क ने वर्ल्डलाइन के भारतीय कारोबार का किया अधिग्रहण, जानिए कितने में हुआ सौदा
क्या है खबर?
पेमेंट गेटवे फर्म बिलडेस्क ने पेरिस की वर्ल्डलाइन के भारत स्थित कारोबार का अधिग्रहण कर लिया है। कंपनी ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी है। इस कदम से उसको पेमेंट एग्रीगेशन, ट्रांजैक्शन स्विचिंग और ओमनीचैनल मर्चेंट एक्विजिशन क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। यह सौदा लगभग 650 करोड़ रुपये में हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों कंपनियों के बीच एक दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर समझौता होगा, जिसके अंतर्गत वर्ल्डलाइन के भुगतान सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा।
फायदा
बिलडेस्क को क्या होगा फायदा?
बिलडेस्क के सह-संस्थापक एम एन श्रीनिवासु ने कहा, "इससे बैंकों, उद्यमों और व्यापारियों के लिए अधिक कनेक्टेड और स्केलेबल भुगतान अनुभव प्रदान करने की क्षमता मजबूत होती है, साथ ही यह सभी बाजारों और क्षेत्रों में डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देता है।" सूत्रों ने बताया कि लेनदेन को अंतिम रूप देने से पहले पेयू और एवेन्यूज AI जैसी भुगतान कंपनियों ने भी इस संपत्ति का मूल्यांकन किया था। इस अधिग्रहण से क्षेत्रीय बाजारों में बिलडेस्क की पहुंच का विस्तार होगा।
सुविधा
दोनों कंपनियां मिलकर देंगी ये सुविधाएं
कंपनी ने कहा, "ये दोनों कारोबार मिलकर शहरी और उभरते बाजारों में डिजिटल लेनदेन, आवर्ती भुगतान, सीमा पार लेनदेन और स्टोर में प्वाइंट-ऑफ-सेल (POS) के साथ QR कार्ड स्वीकृति सहित सर्वव्यापी भुगतान अनुभव प्रदान करेंगे।" इसमें यह अधिग्रहण पेयू द्वारा बिलडेस्क को खरीदने के लिए किए 4.7 अरब डॉलर (करीब 420 अरब रुपये) के सौदे को रद्द करने के 3 साल बाद किया है। इसकी स्थापना एमएन श्रीनिवासु, अजय कौशल और कार्तिक गणपति ने 2000 में की थी।