बैंक से EPF तक नॉमिनी जोड़ते समय इन गलतियों से बचें
क्या है खबर?
नॉमिनी बनाने से आपकी मौत के बाद परिवार को बैंक अकाउंट, निवेश, बीमा और EPF से जुड़ी रकम पाने में आसानी हो सकती है। हालांकि, सिर्फ नॉमिनी बनाने से किसी व्यक्ति को संपत्ति का कानूनी मालिक नहीं माना जाता। इसलिए नॉमिनेशन की जानकारी हमेशा सही और अपडेट रखना जरूरी है। परिवार की स्थिति बदलने के बाद पुरानी जानकारी परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में नॉमिनी से जुड़ी इन सामान्य गलतियों से बचना चाहिए।
#2
नॉमिनी की जानकारी अपडेट न करना
अकाउंट खोलते समय नॉमिनी जोड़कर उसे लंबे समय तक जांचना बड़ी गलती हो सकती है।
शादी, बच्चे का जन्म, तलाक या नॉमिनी की मौत के बाद पुरानी जानकारी बदलना जरूरी हो सकता है। कई लोग बैंक में नॉमिनी अपडेट कर देते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड, डीमैट, बीमा और EPF में बदलाव करना भूल जाते हैं।
इससे परिवार को रकम हासिल करने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए सभी वित्तीय खातों की सूची बनाकर समय-समय पर नॉमिनी की जानकारी जांचें।
#2
एक नॉमिनेशन से सब कुछ मान लेना
एक बैंक अकाउंट में दर्ज नॉमिनी अपने आप आपके शेयर, म्यूचुअल फंड या बीमा का नॉमिनी नहीं बनता।
हर वित्तीय उत्पाद में नॉमिनेशन की अलग प्रक्रिया और नियम हो सकते हैं। इसी तरह, एक से ज्यादा नॉमिनी बनाने पर उनकी हिस्सेदारी की जानकारी सही देना जरूरी है।
नाबालिग बच्चे को नॉमिनी बनाते समय भी सावधानी चाहिए, क्योंकि उसके पैसे संभालने के लिए नियमों के अनुसार अभिभावक या दूसरे व्यक्ति की जरूरत पड़ सकती है।
#3
नॉमिनी को ही कानूनी वारिस समझना
नॉमिनी को ही संपत्ति का अंतिम मालिक मान लेना भी एक बड़ी गलती है।
नॉमिनेशन का उद्देश्य आमतौर पर मृत्यु के बाद संबंधित रकम या संपत्ति पाने की प्रक्रिया आसान करना होता है। कानूनी वारिसों के अधिकार अलग नियमों और लागू कानूनों से तय हो सकते हैं। इसलिए परिवार की स्थिति और अपनी इच्छा के अनुसार वसीयत बनाना भी उपयोगी हो सकता है।
जरूरी वित्तीय खातों और दस्तावेजों की जानकारी किसी भरोसेमंद परिवार सदस्य को देना भी जरूरी है।