UPI पर शुल्क लगाने की बात से भड़के अशनीर ग्रोवर, बोले- इससे नकद लेनदेन बढ़ेगा
क्या है खबर?
भारतपे के सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की संभावना का विरोध किया है। न्यूज 18 से बात करते हुए ग्रोवर ने कहा कि UPI पर किसी भी तरह का चार्ज लगाना टैक्स वसूलने जैसा होगा। उनके मुताबिक, इस कदम से ग्राहक और दुकानदार दोबारा नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं। इससे बैंकों और कारोबारियों का कैश संभालने का खर्च बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मुफ्त यूपीआई ही इसकी सबसे बड़ी ताकत और पहचान है।
सवाल
2,000 रुपये से ज्यादा भुगतान पर सवाल
सरकार के हालिया नोटिफिकेशन में 2,000 रुपये तक के UPI और रुपे डेबिट कार्ड भुगतान पर कोई शुल्क लगाने से रोक लगाई गई है।
हालांकि, इससे ज्यादा रकम वाले UPI भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
ग्रोवर ने इस सीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े भुगतान संख्या में कम हैं, लेकिन कुल लेनदेन की रकम में उनका हिस्सा काफी ज्यादा है। इसलिए इस सीमा का कोई ठोस तर्क नहीं दिखता।
चेतावनी
चार्ज लगा तो बढ़ सकती है नकदी
ग्रोवर ने चेतावनी दी कि बड़े UPI भुगतान पर शुल्क लगने से दुकानदार उसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
कुछ व्यापारी ग्राहकों से अतिरिक्त पैसा मांग सकते हैं या भुगतान को छोटे हिस्सों में बांटने के लिए कह सकते हैं। कई लोग शुल्क से बचने के लिए नकद देना शुरू कर सकते हैं।
इससे ATM, नकदी रखने और उसे बैंकों तक पहुंचाने का खर्च बढ़ेगा। भारत के दोबारा नकदी आधारित अर्थव्यवस्था बनने का खतरा भी रहेगा।
मॉडल
सरकार चाहती है टिकाऊ कमाई का मॉडल
सरकार का कहना है कि UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और तकनीकी ढांचे पर लगातार खर्च बढ़ रहा है।
इसलिए भुगतान व्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कमाई का मॉडल जरूरी है। प्रस्तावित व्यवस्था में बड़े व्यापारिक भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू हो सकता है।
वहीं UPI का इस्तेमाल भारत के अलावा कई देशों में भी हो रहा है और इसकी कुल भुगतान रकम तेजी से बढ़ी है।