बिड-रिगिंग मामले में अडाणी को CCI से बड़ी राहत, आरोप साबित नहीं
क्या है खबर?
भारत के प्रतिस्पर्धा नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अडाणी ग्रुप से जुड़े बिड-रिगिंग मामले में बड़ी राहत दी है। आयोग ने जांच के बाद साफ कहा कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले, इसलिए केस बंद किया जा रहा है। यह मामला SECI के सोलर टेंडर से जुड़ा था। CCI के इस फैसले से अडाणी ग्रुप और इससे जुड़े लोगों को बड़ी कानूनी राहत मिली है और आगे की कार्रवाई फिलहाल रुक गई है।
मामला
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 2019 में सोलर एनर्जी कॉर्पोरशन ऑफ इंडिया (SECI) के सोलर टेंडर से जुड़ा था। आरोप था कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि अडाणी ग्रुप और अज्योर पावर को फायदा मिले और छोटे खिलाड़ी बाहर हो जाएं। शिकायत में यह भी कहा गया कि अज्योर पावर ने अडाणी के लिए प्रॉक्सी बिडर के तौर पर काम किया, लेकिन जांच में इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला।
जांच
बाजार में दबदबे पर CCI ने क्या कहा?
CCI ने अपने फैसले में कहा कि भारत के बिजली उत्पादन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कई बड़े और छोटे खिलाड़ी मौजूद हैं। इससे बाजार में अच्छी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। आयोग के मुताबिक, रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि अडाणी ग्रुप का इस सेक्टर में दबदबा है। इसलिए 'डॉमिनेंस के गलत इस्तेमाल' का आरोप भी सही नहीं पाया गया और इसे खारिज कर दिया गया।
अन्य
टेंडर नियम और अन्य अहम बातें
आयोग ने यह भी साफ किया कि टेंडर की शर्तें तय करना खरीदार का अधिकार होता है और इसे बिना ठोस कारण के गलत नहीं कहा जा सकता। CCI ने कहा कि रिश्वत जैसे आरोप, भले ही कहीं और सही हों, लेकिन वे प्रतिस्पर्धा कानून के तहत नहीं आते। इसलिए इस केस में कोई कानूनी आधार नहीं बनता। आयोग ने दोहराया कि बिना मजबूत सबूत के ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं की जा सकती है।