क्यों किसी भी विदेशी कंपनी ने भारत में EV कारखाना लगाने के लिए नहीं किया आवेदन?
क्या है खबर?
भारत में इलेक्ट्रिक कार बनाने के लिए वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के मकसद से शुरू की गई सरकार की प्रोत्साहन योजना के लिए अब तक किसी भी वाहन निर्माता ने आवेदन नहीं किया है। देश में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के निर्माण को बढ़ावा देने वाली स्कीम (SPMEPCI) को वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए शुरू किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने विदेशी कंपनियों से बातचीत की है, लेकिन अब तक किसी ने भी रुचि नहीं दिखाई।
समझौते
इन समझौते से कंपनियों को होगा फायदा
सूत्रों के मुताबिक, एक संभावित वजह यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (UE) के साथ भारत के ट्रेड एग्रीमेंट के तहत कुछ इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर आयात शुल्क कम होने की संभावना है।
ऐसी रियायतों से वैश्विक कंपनियों को भारत में तुरंत स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाए बिना EV बेचने का एक और रास्ता मिल सकता है।
हालांकि, इन ट्रेड एग्रीमेंट में EV आयात पर सीमित रियायतें ही दी गई हैं और मास-मार्केट सेगमेंट के लिए सुरक्षा उपाय बरकरार रखे गए हैं।
फायदा
समझौते से कितना मिलेगा फायदा?
UK के साथ भारत के कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट के तहत तय कोटे के अंदर आने वाली योग्य गाड़ियों पर इंपोर्ट ड्यूटी धीरे-धीरे 110 से घटकर 10 फीसदी हो जाएगी।
भारत इस समझौते के पहले 15 सालों में UK से 3.78 लाख पेट्रोल-डीजल इंजन वाली गाड़ियों के आयात की इजाजत देगा।
यह समझौता इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को ज्यादा सुरक्षा देता है। यूरोपीय संघ के साथ समझौते से कारों पर लगने वाले टैरिफ भी धीरे-धीरे कम होंगे।