सफेद रबर से बने टायर क्यों होते हैं काले? जानिए कब हुई थी शुरुआत
क्या है खबर?
टायर किसी भी वाहन का अहम पार्ट होते हैं। मोटरसाइकिल हो या कार, ट्रक हो या विमान सभी के टायर के आकार अलग-अलग होते हैं, लेकिन सभी का रंग काला होता है। सफेद रबर से बने होने के बावजूद इनका रंग काला होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे क्या वजह होती है? अगर, आप नहीं जानते तो ऐसा क्यों होता है तो आज के हम आपको बता रहे हैं कि टायरों का रंग काला क्यों होता है।
वजह
इस कारण हुआ काला रंग
असल में टायर बनाने के लिए जिस प्राकृतिक रबर का इस्तेमाल किया जाता है, वो सफेद रंग का होता है, लेकिन रबर सॉफ्ट होने के कारण जल्दी घिसकर खराब हो जाती है। इसे सख्त बनाने बनाने के लिए इसमें एक सामग्री मिलाई जाती है, जिसे ब्लैक कार्बन कहते हैं। इसी के कारण टायर का रंग काला हो जाता है। इसके टायर में मजबूती आती है और इन पर सूरज की किरणों का बुरा असर भी नहीं पड़ता है।
शुरुआत
कब हुई थी काले टायरों की शुरुआत?
बैलगाड़ियों और घोड़ागाड़ियों के लकड़ी के पहियों पर लोहे या चमड़े के पट्टियां लगाई जाती थीं। 1839 में चार्ल्स गुडईयर ने वूलकैनाइज्ड रबर का आविष्कार किया, जिसका प्रयोग साइकिल के टायर बनाने में किया गया। रॉबर्ट थॉमसन ने 1845 में पहला हवा वाला टायर बनाया, लेकिन सफल आविष्कार 1888 में जॉन बॉयड डनलप ने बेटे की साइकिल के लिए किया। शुरू में टायर सफेद रंग के हाेते थे, लेकिन मजबूती के लिए 20 शताब्दी की शुरुआत में काला बनाया गया।