किस गियर में कार चलाने से कम होगा पेट्रोल-डीजल पर खर्चा?
क्या है खबर?
कई बार लोग इस बात की शिकायत करते हैं कि उनकी कार का माइलेज काफी कम है। इसे बेहतर करने के लिए हजारों रुपये भी खर्च करते हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं होता। ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कार में ड्राइवर के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते। हालांकि, मैनुअल गियरबॉक्स वाली कार में चालक का पूरा नियंत्रण होता है, जिसका माइलेज पर असर पड़ता है। आइये जानते हैं कि कार के गियर ईंधन दक्षता को कैसे प्रभावित करते हैं।
असर
गियर का माइलेज पर क्या पड़ता है असर?
सभी जानते हैं कि ऊंचे गियर से फ्यूल की खपत सबसे कम होती है, लेकिन यह नियम केवल हाईवे पर ही लागू होता है, क्योंकि ऊंचे गियर का मतलब ही तेज गति है। शहरों में बहुत-सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है और ट्रैफिक भी अधिक होता है। इसलिए, कार को ऊंचे गियर में चलाना उचित नहीं है। आप धीमी गति से ऊंचे गियर में गाड़ी चलाते हैं तो इंजन पर दबाव बढ़ने लगेगा, जो इंजन के लिए हानिकारक है।
चयन
कौनसे गियर का करें इस्तेमाल?
कार को अगर सही गियर में चलाया जाए तो फिर बेहतर माइलेज मिल सकता है। कई बार लोग निचले गियर में ही कार को ज्यादा समय तक चलाते हैं। इससे इंजन पर अनावश्यक भार पड़ता है, जिससे माइलेज कम हो जाता है। कार को पहले गियर में सिर्फ स्टार्ट करने के बाद कुछ देर के लिए चलाना चाहिए। इसके बाद लगातार गियर बदलते रहना चाहिए और लंबे सफर के दौरान सबसे ऊंचे गियर पर ही चलाना चाहिए।
RPM
RPM का भी रखें ध्यान
कार में RPM का भी ध्यान रखने से माइलेज को सुधारा जा सकता है। जब भी RPM 2,000 से 3,000 के बीच आ जाए तो हमेंशा गियर को बदल देना चाहिए। इससे इंजन पर अनावश्यक भार नहीं पड़ता और माइलेज बेहतर रहता है। शहर में ट्रैफिक के बीच कार ड्राइविंग के दौरान माइलेज कम हो जाता है। इस समय पहले और दूसरे गियर में ही चलाना बेहतर होता है, जबकि खुली सड़क पर सबसे ऊचें गियर में रखना चाहिए।