बाइक में ट्रैक्शन कंट्रोल कब काम आता है और कब इसकी जरूरत नहीं होती?
क्या है खबर?
आजकल कई महंगी और प्रीमियम बाइक्स में ट्रैक्शन कंट्रोल फीचर दिया जाता है। इसका काम तेज रफ्तार या फिसलन वाली सड़क पर बाइक के पहियों को बेवजह घूमने से रोकना है। जब पीछे का पहिया जरूरत से ज्यादा घूमने लगता है, तो यह सिस्टम इंजन की ताकत को कम कर देता है। इससे बाइक पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलती है। खासकर बारिश, गीली सड़क और अचानक तेज एक्सीलेरेशन के समय यह फीचर उपयोगी साबित होता है।
#1
बारिश और फिसलन में ज्यादा काम का
ट्रैक्शन कंट्रोल का सबसे ज्यादा फायदा तब मिलता है, जब सड़क पर पकड़ कम हो।
बारिश के दौरान गीली सड़क, कीचड़, रेत या कंकड़ पर पीछे का पहिया तेजी से घूम सकता है। ऐसे समय सिस्टम पहिए की गति पर नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर इंजन की ताकत घटाता है।
इससे बाइक का पिछला हिस्सा फिसलने की संभावना कम होती है। अचानक एक्सीलेटर बढ़ाने पर भी यह फीचर बाइक को संभालने में मदद करता है।
#2
हर स्थिति में इसकी जरूरत नहीं
सामान्य सूखी और साफ सड़क पर सावधानी से बाइक चलाने पर ट्रैक्शन कंट्रोल की जरूरत उतनी ज्यादा नहीं होती।
अनुभवी राइडर ऐसी स्थिति में एक्सीलेटर को सही तरीके से नियंत्रित कर सकता है। धीमी गति से सामान्य सफर करते समय यह सिस्टम बहुत कम सक्रिय होता है। हालांकि, इसे बंद करने का विकल्प हर बाइक में नहीं मिलता।
अगर सड़क पर पकड़ कम हो या मौसम खराब हो, तो इसे बंद करने के बजाय चालू रखना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
#3
ऑफ-रोड में कभी-कभी करना पड़ता है बंद
कुछ बाइक्स में ट्रैक्शन कंट्रोल को बंद या अलग स्तर पर सेट करने का विकल्प मिलता है।
ऑफ-रोड राइडिंग में रेत, मिट्टी या चढ़ाई पर पीछे के पहिए को थोड़ा घूमने देना जरूरी हो सकता है। ऐसे मामलों में अनुभवी राइडर जरूरत के हिसाब से सिस्टम की सेटिंग बदल सकता है।
सामान्य सड़क पर इसे बंद करना सही नहीं माना जाता। बाइक खरीदते समय यह भी देखना चाहिए कि ट्रैक्शन कंट्रोल में कितने स्तर और सेटिंग उपलब्ध हैं।