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कार में टायर रोटेशन कब और क्यों कराना चाहिए? जानिए इसका फायदा
कई लोग केवल टायर घिसने के बाद इस पर ध्यान देते हैं

कार में टायर रोटेशन कब और क्यों कराना चाहिए? जानिए इसका फायदा

Jul 27, 2026
08:41 am

क्या है खबर?

कार की नियमित सर्विस जितनी जरूरी होती है, उतना ही जरूरी समय पर टायर रोटेशन कराना भी माना जाता है। कई लोग केवल टायर घिसने के बाद इस पर ध्यान देते हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर समय पर टायर रोटेशन कराया जाए तो टायर लंबे समय तक चलते हैं और गाड़ी की पकड़ भी बेहतर बनी रहती है। इससे सफर अधिक सुरक्षित होता है और अचानक होने वाली समस्याओं से भी आसानी से बचाव किया जा सकता है।

#1

कब कराना चाहिए टायर रोटेशन?

कार का टायर रोटेशन हर 8,000 से 10,000 किलोमीटर के बीच या वाहन निर्माता की सलाह के अनुसार कराना चाहिए।

अगर आप खराब या ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर ज्यादा सफर करते हैं तो इसे थोड़ा पहले भी कराया जा सकता है। हर सर्विस के दौरान टायरों की स्थिति की जांच जरूर करानी चाहिए।

इससे समय रहते घिसावट का पता चल जाता है और सही फैसला लेना काफी आसान हो जाता है।

#2

टायर रोटेशन क्यों जरूरी होता है?

कार के सभी टायर एक जैसी गति से नहीं घिसते।

आगे और पीछे लगे टायरों पर अलग-अलग दबाव पड़ता है, जिससे उनकी घिसावट भी अलग होती है। टायर रोटेशन करने से सभी टायरों का इस्तेमाल बराबर होता है और उनकी उम्र बढ़ जाती है।

इसके साथ गाड़ी की पकड़, संतुलन और ब्रेक लगाने की क्षमता भी बेहतर बनी रहती है। इससे नए टायर जल्दी खरीदने की जरूरत भी काफी हद तक कम पड़ती है।

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#3

इन बातों का भी रखें खास ध्यान

टायर रोटेशन के साथ टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और व्हील बैलेंसिंग की जांच भी करानी चाहिए।

अगर किसी टायर में कट, उभार या ज्यादा घिसावट दिखाई दे तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। सही देखभाल से टायर बेहतर प्रदर्शन करते हैं और ईंधन की खपत भी नियंत्रित रहती है।

थोड़ी-सी सावधानी आपकी यात्रा को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के बनाए रखने में मदद करती है।

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