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क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम, जिसे सरकार 2028 से लागू करेगी?
सरकार दुर्घटना कम करने के लिए V2V कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य करने की तैयारी में है

क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम, जिसे सरकार 2028 से लागू करेगी?

Aug 04, 2026
07:13 pm

क्या है खबर?

भारत दुनिया के उन पहले बड़े ऑटोमोटिव बाजारों में से एक बन सकता है, जो कई तरह के वाहनों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को अनिवार्य कर दे। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव है, जिसके तहत नए वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। टक्कर और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

प्रस्ताव 

कौन-सी श्रेणी के वाहनों में होगा अनिवार्य?

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अक्टूबर, 2028 या उसके बाद बनने वाले सभी नए L, M और N श्रेणी के वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम लगाना जरूरी होगा।

L श्रेणी में दोपहिया और तिपहिया वाहन आते हैं, M श्रेणी में कार, SUV और बस जैसे यात्री वाहन शामिल हैं, जबकि N श्रेणी में ट्रक और हल्के कमर्शियल वाहन आते हैं।

पहले से ही V2V टेक्नोलॉजी वाले वाहनों को 1 अक्टूबर, 2027 से तय मानकों का पालन करना होगा।

V2V

मौजूदा सिस्टम से क्या है इसमें अलग?

पारंपरिक सुरक्षा सिस्टम कैमरों, रडार और दूसरे ऑनबोर्ड सेंसर पर निर्भर करते हैं, लेकिन V2V कम्युनिकेशन की मदद से गाड़ियां आस-पास के वाहनों के साथ वायरलेस तरीके से स्पीड, पोजिशन, दिशा और तेजी जैसी जानकारी का आदान-प्रदान कर सकती हैं।

इससे खतरे का चालक की सीधी नजर या ऑनबोर्ड सेंसर की रेंज से बाहर होने पर भी पता चल जाता है।

यह ड्राइवरों को आगे की गाड़ियों के इमरजेंसी ब्रेक लगाने, ब्लॉइंड मोड़ के बारे में अलर्ट कर सकता है।

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स्पेक्ट्रम

नई फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करेगा सिस्टम 

इस सपोर्ट करने के लिए दूरसंचार विभाग ने V2V कम्युनिकेशन और दूसरे इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (ITS) ऐप के लिए 5.875GHz से 5.925GHz फ्रीक्वेंसी बैंड पहले ही अलॉट कर दिया है।

यह स्पेक्ट्रम गाड़ियों के बीच कम-लेटेंसी वाला कम्युनिकेशन मुमकिन बनाएगा, जो रियल-टाइम में सुरक्षा से जुड़े मैसेज भेजने के लिए बहुत जरूरी है।

इसे चरणों में लागू करने का मकसद वाहन निर्माताओं और पार्ट्स सप्लायर्स को नई टेक्नोलॉजी और पार्ट्स को विकसित के लिए पर्याप्त समय देना है।

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