मारुति सुजुकी की बाजार हिस्सेदारी 13 साल के निचले स्तर पर पहुंची
क्या है खबर?
भारतीय कार बाजार में मारुति सुजुकी की पकड़ वित्त वर्ष 2026 में कमजोर हो गई। इसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 13 सालों के निचले स्तर 39.26 प्रतिशत पर आ गई। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, इसने लगातार तीसरी बार बाजार हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की है। एक समय घरेलू बाजार के लगभग आधे हिस्से पर कब्जा रखने वाली कंपनी ने वित्त वर्ष 2020 से लगभग 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी खो दी है।
SUV सेगमेंट
SUV सेगमेंट में भी नहीं मिला फायदा
पिछले 3.5 सालों में सबसे बड़ी कार निर्माता की ओर से तेजी से बढ़ते स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट में जिम्नी और विक्टोरिस जैसी गाड़ियां लॉन्च करने के बावजूद यह गिरावट आई है। SUV सेगमेंट अब भारत के यात्री वाहन बाजार का 67 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन इस श्रेणी में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से भी कम है। यह हाल के वर्षों में उद्योग की वृद्धि को गति देने वाले इस सेगमेंट में इसकी कमजोरी उजागर करती है।
बढ़त
इन मॉडल्स पर ज्यादा निर्भर है कंपनी
कंपनी मारुति वैगनआर, स्विफ्ट और बलेनो जैसी 4-मीटर से कम लंबाई वाली कारों पर निर्भर है, जहां इसकी 67 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी है। हालांकि, इस सेगमेंट में वृद्धि दर में गिरावट आई है और वित्त वर्ष 2026 में यह 2 प्रतिशत से भी कम रही, जबकि यूटिलिटी वाहनों में यह 11 प्रतिशत थी। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता मांग में बदलाव के कारण मारुति का दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार बाजार में दबदबा कम हो रहा है।
फायदा
दूसरी कंपनियां उठा रही इसका फायदा
मारुति सुजुकी की गिरावट के साथ ही प्रतिस्पर्धी कार निर्माता कंपनियों को हिस्सेदारी में फायदा हुआ है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने थार, बोलेरो और स्कॉर्पियो जैसे मॉडल्स की बदौलत वित्त वर्ष 2026 तक अपनी बाजार हिस्सेदारी को 5 वर्षों में दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर 14.21 प्रतिशत कर लिया है। वित्त वर्ष 2021 में चौथे स्थान पर रहने वाली यह कंपनी दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी बनकर उभरी। टाटा मोटर्स ने 13 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है।