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कारों में कैसे हुई थी एयरबैग की शुरुआत? जानिए कैसे आया था विचार
कारों में एयरबैग अब अनिवार्य सुरक्षा सुविधा है

कारों में कैसे हुई थी एयरबैग की शुरुआत? जानिए कैसे आया था विचार

May 08, 2026
08:59 am

क्या है खबर?

वर्तमान में एयरबैग कारों में अनिवार्य सुरक्षा सुविधा बन चुकी है। यह हादसे के वक्त चालक और अन्य यात्रियों की जान बचाने के साथ नुकसान को कम करता है। एक दशक पहले तक यह फीचर बजट कारों में मिलता ही नहीं था, केवल महंगी कारों तक सीमित था, लेकिन अब सभी में जरूरी है। कई लग्जरी कारों में इनकी संख्या 10 या उससे ज्यादा तक पहुंच गई है। आइये जानते हैं कारों में एयरबैग की शुरुआत कब और कैसे हुई।

विचार 

ऐसे आया एयरबैग का विचार 

एयरबैग की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी, जब अमेरिकी नौसेना में सेवा दे चुके एक इंजीनियर जॉन हेट्रिक अपनी पत्नी और बेटी के साथ गाड़ी चला रहे थे और तभी एक दुर्घटना का शिकार हो गए। इस घटना से उनको इस बात का अहसास हुआ कि टक्कर की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले उपकरण की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने वाहनों के लिए 'सुरक्षा कुशन असेंबली' के प्रोटोटाइप विकसित किए।

तकनीक 

शुरू में कैसे काम करते थे एयरबैग?

हेट्रिक के सुरक्षा कुशन असेंबली के डिजाइन में कम्प्रेस्ड हवा के टैंक से जुड़ा एक फुलाने योग्य बैग शामिल है। ये बैग स्टीयरिंग व्हील के अंदर डैशबोर्ड के बीच में या ग्लोव बॉक्स के पास स्थित होते थे। इसमें स्प्रिंग सिस्टम का उपयोग किया गया, जो झटके को महसूस करता था और टैंक में लगे वाल्वों को एक्टिव करता था, जिससे हवा भरने से बैग फूल जाता था। हालांकि, तकनीक में कमी के कारण इसे कार निर्माताओं नहीं अपनाया।

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सुधार 

तकनीक में किया गया सुधार 

1967 में अमेरिकी इंजीनियर एलन के ब्रीड ने एयरबैग के लिए दुर्घटना का पता लगाने के लिए 'बॉल-इन-ट्यूब' तंत्र विकसित किया। उनके सिस्टम में एक विद्युत चुम्बकीय सेंसर और एक स्टील की गेंद का उपयोग किया गया, जो एक चुंबक द्वारा ट्यूब से जुड़ी हुई थी। कम्प्रेस्ड हवा का उपयोग करने के बजाय सोडियम एजाइड के छोटे विस्फोट के साथ इसका उपयोग एयरबैग को फुलाने के लिए किया जाता था। इस तकनीक को एयरबैग उद्योग की शुरुआत माना जाता है।

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शुरुआत 

एयरबैग वाली पहली कार 

एयरबैग तकनीक में क्रांति के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कारों में इसके प्रयोग का फैसला किया। GM और फोर्ड मोटर्स ने 70 के दशक में कुछ परीक्षण कारों में एयरबैग लगाना शुरू किया। GM ने सरकारी बेड़े की खरीद के लिए 1973 शेवी इम्पाला को एयरबैग से लैस बनाने का निर्णय लिया। इन कारों का 20 साल बाद दुर्घटना परीक्षण किया गया और परिणाम शानदार रहे। यात्री एयरबैग के साथ उपलब्ध होने वाली पहली कार GM की ओल्ड्समोबाइल टोरोनाडो थी।

भारत 

भारत में कब हुई शुरुआत?

भारत में फोक्सवैगन पोलो ऐसी बजट कार थी, जिसमें एयरबैग स्टैंडर्ड दिया गया। इसके बाद होंडा और टोयोटा ने भी ऐसा करना शुरू किया, वहीं टाटा मोटर्स, महिंद्रा और रेनो ने अपनी कारों के मिड वेरिएंट से 2 फ्रंट एयरबैग्स देने शुरू किए। अप्रैल, 2019 से भारत में बेची जाने वाली सभी कारों में चारों पहियों के लिए ABS, रिवर्स पार्किंग सेंसर, ड्राइवर और यात्री सीटबेल्ट रिमाइंडर, गति सीमा अलर्ट और ड्राइवर-साइड एयरबैग मानक सुरक्षा सुविधाओं को अनिवार्य कर दिया।

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