क्या पाकिस्तान को हथियार भेज रहे हैं चीन-तुर्की? 60 घंटे तक सैन्य विमानों ने लगाए चक्कर
क्या है खबर?
अटकलें हैं कि चीन और तुर्की पाकिस्तान को हथियार या सैन्य उपकरण भेज रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों के सैन्य परिवहन विमानों ने लगातार 60 घंटे तक पाकिस्तान के कई चक्कर लगाए हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, एक शीर्ष सुरक्षा सूत्र ने बताया कि रावलपिंडी के पास पाकिस्तान के नूर खान हवाई अड्डे और कराची के मसरूर हवाई अड्डे पर चीनी सैन्य विमानों को उतरते देखा गया।
रिपोर्ट
रक्षा विशेषज्ञों ने घटनाक्रम को 'असामान्य' बताया
रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के सैन्य परिवहन विमान भी इस दौरान पाकिस्तान के चक्कर लगाते रहे। यह घटनाक्रम पाकिस्तान, चीन और तुर्की के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के बीच सामने आया है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि विमानों की आवाजाही ड्रोन और दूसरी रक्षा सामग्री सहित सैन्य उपकरणों के परिवहन से जुड़ी थी।
रक्षा विशेषज्ञों ने 60 घंटे के दौरान विमानों की भारी आवाजाही को असामान्य बताया है।
समय
क्यों अहम है घटनाक्रम?
इस घटनाक्रम का समय भी बेहद अहम है। 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मक्का में एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें प्रावधान है कि किसी भी एक पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
साथ ही PoK में प्रदर्शन और पाकिस्तान, चीन और तुर्की की बढ़ती नजदीकी भी अहम है।
बांग्लादेश में ISI की बढ़ती सक्रियता को भी नए गठजोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
तुर्की
पाकिस्तान को सैन्य आपूर्ति करते रहे हैं चीन और तुर्की
पाकिस्तान लड़ाकू विमान, वायु रक्षा प्रणाली और बिना पायलट वाले प्लेटफॉर्म के लिए चीन पर निर्भर रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान यह रिश्ता और भी मजबूत हुआ है। चीन ने खुद स्वीकार किया है कि तब उसने पाकिस्तान को तकनीकी मदद दी थी।
वहीं, तुर्की, खासतौर पर ड्रोन, नौसेना प्रणालियों और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पाकिस्तान का सहयोगी बना हुआ है। मई में पाकिस्तानी वायु सेना प्रमुख ने तुर्की में रक्षा मुद्दे पर अहम बैठक की थी।
सहयोग
तुर्की और पाकिस्तान में कैसे बढ़ रहा है सैन्य सहयोग?
इसी महीने तुर्की और पाकिस्तान ने लड़ाकू विमानों के विकास में सहयोग को और गहरा करने के लिए कदम उठाया था। तुर्की ने कहा था कि लगभग 200 पाकिस्तानी इंजीनियर और अधिकारी पहले से ही तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम के विकास में शामिल हैं।
तुर्की पाकिस्तान को औपचारिक रूप से इस परियोजना में शामिल करने के लिए भी बातचीत शुरू करने जा रहा है।
ड्रोन क्षेत्र में भी दोनों देशों में गहरा सहयोग है।