ईरान युद्ध बढ़ने से साढ़े 4 करोड़ लोगों पर भुखमरी का खतरा, WFP ने दी चेतावनी
क्या है खबर?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के लंबा खिंचने से अब भुखमरी का खतरा बढ़ गया है। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि ईरान में जारी संघर्ष के कारण जून तक अतिरिक्त साढ़े 4 करोड़ लोग भीषण भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं। 28 फरवरी से चल रहे युद्ध ने मानवीय सहायता के प्रमुख मार्गों को बाधित कर दिया है। इससे दुनिया के कुछ सबसे भीषण संकटग्रस्त क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आपूर्ति में बाधित हुई है।
आंकड़ा
31 करोड़ से अधिक हो सकता है वैश्विक भुखमरी का आंकड़ा
WFP का अनुमान है कि मौजूदा संघर्ष के कारण वैश्विक भुखमरी का स्तर मौजूदा रिकॉर्ड 31 करोड़ से भी ऊपर जा सकता है। WFP के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा, "इस युद्ध से वैश्विक भूखमरी स्तर सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच जाएगा और यह बेहद भयावह स्थिति है। इस युद्ध से पहले भी हम एक ऐसे संकट का सामना कर रहे थे। भूख की गंभीरता और संख्या के हिसाब से यह स्थिति पहले कभी इतनी गंभीर नहीं थी।"
लागत
माल ढुलाई लागत में हुई 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी
स्काउ के अनुसार, फरवरी के अंत से माल ढुलाई लागत में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ये अतिरिक्त खर्च ऐसे समय आए हैं जब WFP खर्च में भारी कटौती का सामना कर रहा है। WFP वर्तमान में लेबनान में जमीनी स्तर पर काम कर रहा है और हजारों लोगों को गर्म भोजन और रोटी उपलब्ध करा रहा है। अगले 3 महीनों तक के लिए उसे तत्काल 7.70 करोड़ डॉलर (लगभग 711 करोड़ रुपये) अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है।
प्रभाव
कृषि स्थिरता पर भी पड़ रहा युद्ध का असर
अंतरराष्ट्रीय अनुदान में कमी आने के कारण WFP को पिछले वर्ष अपने संसाधनों में 40 प्रतिशत की कटौती करनी पड़ी है। स्काउ ने कहा कि वे अपनी सीमा पार कर चुके हैं और परिचालन लागत बढ़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संकट कृषि स्थिरता को भी खतरे में डाल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से उर्वरक निर्यात बाधित होने से सोमालिया और केन्या जैसे उप-सहारा अफ्रीकी देशों के लिए बुवाई के मौसम में बड़ा जोखिम हो रहा है।
अकाल
सोमालिया में संभावित अकाल का खतरा
स्काउ ने कहा कि लगातार सूखे के कारण सोमालिया में अकाल की आशंका है। धन की कमी से WFP वहां 7 लाख लोगों की मदद करने में जूझ रहा है। संसाधनों की कमी के कारण एजेंसी को अन्य क्षेत्रों में भी कटौती करनी पड़ी है। सूडान में अकाल से पीड़ित लोगों के लिए जीवन रक्षक खाद्य राशन कम हो गया है, जबकि अफगानिस्तान में केवल चार में से एक गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे का ही भरण-पोषण हो रहा है।