
एडिलेड टेस्ट के बाद पृथ्वी शॉ को निकाला नहीं जाना चाहिए था- आशीष नेहरा
क्या है खबर?
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बीते शुक्रवार को अपनी टीम घोषित की है। इस टीम में युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को जगह नहीं मिली है।
शॉ को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहले टेस्ट के बाद से ही भारतीय टीम में जगह नहीं मिली है।
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के हिसाब से शॉ को इस तरह टीम से बाहर नहीं किया जाना था।
मामला
इस प्रकार टीम से बाहर हुए थे शॉ
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहले टेस्ट में शॉ दोनों पारियों में मिलाकर केवल चार रन बना सके थे। पहली पारी में वह शून्य और दूसरी पारी में चार के स्कोर पर आउट हुए थे।
दोनों पारियों में अंदर आती गेंद पर क्लीन बोल्ड होने वाले शॉ की तकनीक पर लोगों ने सवाल उठाने शुरु कर दिए थे। इसके बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन और बाद में टीम से ही बाहर कर दिया गया था।
बयान
एक टेस्ट के आधार पर टीम से निकालना उचित नहीं- नेहरा
इंडिया टुडे के मुताबिक नेहरा ने क्रिकबज से बात करते हुए कहा कि तकनीक की बात करें तो किसी भी खिलाड़ी के लिए यह कठिन होता।
उन्होंने आगे कहा, "एडिलेड टेस्ट के दौरान वह ऐसे खिलाड़ी नहीं थे जिसके पास 30-40 टेस्ट का अनुभव हो। हम एक युवा खिलाड़ी की बात कर रहे थे। एक टेस्ट के आधार पर उन्हें टीम से निकालना सही नहीं था। मेरे हिसाब से उन्हें एक टेस्ट के बाद नहीं निकालना था।"
भारतीय टीम
लगातार भारतीय टीम से बाहर रहे हैं शॉ
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तीन टेस्ट मैच में बेंच पर बैठने के बाद शॉ को इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज के लिए भी टीम में नहीं चुना गया था। इसके अलावा वह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे और टी-20 सीरीज के लिए भी टीम में नहीं चुने गए थे।
शॉ को इससे पहले पिछले साल खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन के बीच में ही दिल्ली कैपिटल्स (DC) ने भी प्लेइंग इलेवन से बाहर किया था।
विजय हजारे ट्रॉफी
विजय हजारे ट्रॉफी में शॉ ने किया था धमाकेदार प्रदर्शन
मुंबई के बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने विजय हजारे ट्रॉफी के एक सीजन में सबसे अधिक रन बनाने के मयंक अग्रवाल के रिकॉर्ड को तोड़ा है। उन्होंने इस साल खेले गए टूर्नामेंट के आठ मैचों में 827 रन बनाए थे।
इस दौरान उन्होंने 227 रनों की एक नाबाद पारी भी खेली थी जो इस टूर्नामेंट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। नॉकआउट मुकाबलों में मुंबई की कप्तानी करके उन्होंने अपनी टीम को चैंपियन भी बनाया था।