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यूट्यूब के AI डीपफेक डिटेक्शन टूल का अब वयस्क यूजर उठा सकेंगे फायदा
यूट्यूब ने AI डीपफेक डिटेक्शन टूल का विस्तार किया है

यूट्यूब के AI डीपफेक डिटेक्शन टूल का अब वयस्क यूजर उठा सकेंगे फायदा

May 16, 2026
03:58 pm

क्या है खबर?

यूट्यूब ने अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डीपफेक डिटेक्शन प्रोग्राम को सभी वयस्क यूजर्स के लिए विस्तारित कर दिया है। यह फीचर पहले केवल कंटेंट क्रिएटर्स और चुनिंदा सार्वजनिक हस्तियों के लिए उपलब्ध था। टूल यूजर के चेहरे के सेल्फी-स्टाइल स्कैन का उपयोग करके यूट्यूब पर संभावित डीपफेक की पहचान करता है। अगर, कोई मिलान मिलता है तो प्लेटफॉर्म यूजर को सूचित करता है, इसके बाद उपयोगकर्ता के पास यूट्यूब से कंटेंट हटाने का अनुरोध करने का विकल्प होता है।

विस्तार 

कंटेंट क्रिएटर्स से हुई थी शुरुआत

वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने इस फीचर का परीक्षण पहले कंटेंट क्रिएटर्स के साथ शुरू किया और फिर इसे सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं, पत्रकारों और अंत में मनोरंजन उद्योग तक विस्तारित किया। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के किसी भी यूजर के लिए इसका विस्तार एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह मूल रूप से आम आदमी को यूट्यूब पर ऐसे कंटेंट की लगातार निगरानी करने की क्षमता देता है, जिसमें उनकी इमेज का उपयोग किया जा सकता है।

अनुरोध 

गोपनीयता के आधार पर करती है मूल्यांकन

यूट्यूब अपनी गोपनीयता नीति के आधार पर कंटेंट हटाने के अनुरोधों का मूल्यांकन करता है। कंपनी क्या कंटेंट में AI जनरेटेड लेबल लगाया गया है या नहीं जैसे कई कारकों को देखती है। पैरोडी या व्यंग्य के लिए अपवाद हैं और यह टूल केवल चेहरे की समानता को कवर करता है, आवाज जैसी अन्य पहचान करने वाली विशेषताओं को नहीं। यूजर इस प्रोग्राम से बाहर निकल सकते हैं और प्लेटफॉर्म द्वारा अपना डाटा डिलीट करवा सकते हैं।

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