आधुनिक युद्ध में डाटा सेंटर क्यों बन रहे हैं आसान निशाना, क्या हैं इनकी कमजोरियां?
क्या है खबर?
रूस और मिडिल ईस्ट में हुए हमलों से पता चला है कि अब डाटा सेंटर भी युद्ध के अहम निशाने बन रहे हैं। ये केंद्र इंटरनेट, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को चलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन ने रूस की तकनीकी कंपनी यांडेक्स के डाटा सेंटर पर हमले किए, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेजन के डाटा सेंटर को निशाना बनाया। इससे जरूरी डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ा है।
सेवाएं
हमलों से इंटरनेट और दूसरी सेवाएं हुईं प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में यूक्रेन के ड्रोन हमलों में यांडेक्स के 3 डाटा सेंटर प्रभावित हुए।
इसके बाद ईमेल, भुगतान और रास्ता बताने वाली सेवाओं में रुकावट आई। मार्च, 2026 में ईरानी ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) के 2 केंद्रों पर हमला किया और बहरीन में एक केंद्र को नुकसान पहुंचाया।
बिजली और उपकरणों पर असर पड़ने से सेवाएं बाधित हुईं। कुछ ग्राहकों को अपना डेटा वापस पाने में भी परेशानी हुई।
वजह
डाटा सेंटर पर हमले क्यों किए जा रहे हैं?
डाटा सेंटर में बड़ी मात्रा में कंप्यूटर और महंगे प्रोसेसर लगे होते हैं, जिनका इस्तेमाल इंटरनेट सेवाओं और AI तकनीक को चलाने में होता है।
ऐसे केंद्रों को नुकसान पहुंचने से किसी देश की डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। रूस में यांडेक्स के केंद्रों पर हमलों से ईमेल और भुगतान जैसी सेवाएं बाधित हुईं।
रूस पहले से ही आधुनिक चिप्स की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में इन केंद्रों को नुकसान उसकी मुश्किलें बढ़ा सकता है।
निशाना
डाटा सेंटर को निशाना बनाना क्यों आसान है?
डाटा सेंटर को दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं होता।
इन्हें चलाने के लिए लगातार बिजली, ठंडा रखने की व्यवस्था और तेज इंटरनेट कनेक्शन जरूरी हैं। इन केंद्रों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर और महंगे उपकरण लगे होते हैं। बिजली या ठंडा रखने वाली व्यवस्था को नुकसान पहुंचने पर पूरा केंद्र बंद हो सकता है, भले ही कंप्यूटर सही हों।
उपकरण बदलने और सेवाएं फिर शुरू करने में समय लग सकता है, खासकर जब जरूरी सामान आसानी से न मिले।
अन्य
हमलों से बचने के लिए क्या कर सकती हैं कंपनियां?
कंपनियां जरूरी जानकारी की अलग-अलग जगहों पर प्रतियां रखकर और काम को कई डाटा सेंटर में बांटकर नुकसान का खतरा कम कर सकती हैं।
इससे एक केंद्र बंद होने पर दूसरी जगह से सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। यूक्रेन की कुछ कंपनियों ने यूरोप में मौजूद सर्वर पर भी जानकारी सुरक्षित रखी है।
हालांकि, एक ही जगह पर निर्भरता कम करने के बाद भी बड़े AI मॉडल को तैयार करने के लिए कंप्यूटर व्यवस्था चुनौती बना हुआ है।