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नासा के आर्टेमिस II मिशन में कौन से दिन क्या काम करेंगे वैज्ञानिक?
नासा आर्टेमिस II को लॉन्च करने वाली है

नासा के आर्टेमिस II मिशन में कौन से दिन क्या काम करेंगे वैज्ञानिक?

Mar 30, 2026
06:21 pm

क्या है खबर?

अंतरिक्ष एजेंसी नासा 1 अप्रैल, 2026 को अपने अगले चंद्र मिशन आर्टेमिस II को लॉन्च करने वाली है। यह मिशन करीब 10 दिनों का होगा, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री को चांद के चारों ओर भेजा जाएगा। यह अपोलो मिशन के बाद पहला मानव मिशन होगा जो चांद के पास जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में इंसानों को चांद की सतह पर उतारने की तैयारी करना है और नई तकनीकों को अंतरिक्ष में परखना भी इसमें शामिल है।

लॉन्च

लॉन्च और शुरुआती जांच

यह मिशन फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट के जरिए शुरू होगा, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। लॉन्च के बाद ओरियन कैप्सूल रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करेगा। पहले दो दिन अंतरिक्ष यात्री सभी जरूरी सिस्टम जैसे लाइफ सपोर्ट, नेविगेशन और कम्युनिकेशन की जांच करेंगे, ताकि आगे की यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी की जा सके और किसी भी समस्या से बचा जा सके।

यात्रा

चांद की ओर यात्रा

सिस्टम जांच के बाद अंतरिक्ष यान एक खास इंजन बर्न करेगा, जिससे वह पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चांद की ओर बढ़ेगा। तीसरे और चौथे दिन के दौरान अंतरिक्ष यात्री लगातार सिस्टम पर नजर रखेंगे और मिशन कंट्रोल से संपर्क बनाए रखेंगे। इस दौरान वे पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी तक पहुंचेंगे और अंतरिक्ष में काम करने के नए अनुभव हासिल करेंगे, जिससे आगे के मिशन और सुरक्षित बनाए जा सकेंगे।

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वापसी

चांद के पास से वापसी

अंतरिक्ष यान चांद के पीछे से एक खास रास्ते पर गुजरेगा, जिसे फ्री रिटर्न ट्रैजेक्टरी कहा जाता है। इस रास्ते की मदद से बिना ज्यादा ईंधन खर्च किए अंतरिक्ष यान अपने आप पृथ्वी की ओर लौटने लगेगा। इस चरण में स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर होगा। इसके बाद पांचवें से आठवें दिन तक क्रू वापसी के दौरान अलग-अलग सिस्टम की जांच करेगा और अंतरिक्ष में काम करने की क्षमता को और बेहतर समझेगा।

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परीक्षण

धरती पर वापसी और परीक्षण

मिशन के आखिरी चरण में ओरियन कैप्सूल तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इस दौरान इसकी हीट शील्ड की जांच होगी, जो इसे गर्मी से बचाएगी। इसके बाद कैप्सूल पैराशूट की मदद से प्रशांत महासागर में उतरेगा। वहां से रिकवरी टीम अंतरिक्ष यात्री को सुरक्षित बाहर निकालेगी। यह पूरा मिशन भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे आगे के मिशन को दिशा मिलेगी।

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