आर्टेमिस II मिशन के ओरियन कैप्सूल की क्या है खासियत?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आज (2 अप्रैल) सुबह करीब 4:00 बजे अपने आर्टेमिस II अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस मिशन के तहत करीब 50 साल बाद इंसान फिर चांद की दिशा में भेजे गए हैं। चार अंतरिक्ष यात्री इस मिशन में शामिल हैं, जो लगभग 10 दिन तक अंतरिक्ष में रहकर चांद के पास तक जाएंगे। यह मिशन भविष्य में इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
ओरियन कैप्सूल
ओरियन कैप्सूल: छोटा लेकिन बेहद खास स्पेसक्राफ्ट
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री जिस ओरियन कैप्सूल में सफर कर रहे हैं, वह आकार में एक छोटी मिनीवैन जैसा है। इसमें करीब 9.3 क्यूबिक मीटर जगह है, जहां चारों अंतरिक्ष यात्रियों को साथ रहना, काम करना और आराम करना होगा। हालांकि, जगह कम है, लेकिन माइक्रोग्रैविटी की वजह से वे तैरते हुए इस स्पेस का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे यह अंदर से थोड़ा ज्यादा खुला और आरामदायक महसूस होता है।
जगह
सीमित जगह में रहने और काम करने की चुनौती
ओरियन कैप्सूल में हर चीज को बहुत सोच-समझकर डिजाइन किया गया है, ताकि कम जगह में ज्यादा काम हो सके। यहीं पर अंतरिक्ष यात्री खाना खाएंगे, सोएंगे और अपने मिशन से जुड़े काम करेंगे। उन्हें अपनी जगह और समय को आपस में बांटना होगा। इसमें बड़ी खिड़कियां भी दी गई हैं, जिससे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी और चांद का नजारा देख सकेंगे। यह कैप्सूल भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों के लिए तैयार किया गया है।
तकनीक
तापमान और स्पीड से जुड़ी खास सुरक्षा तकनीक
ओरियन कैप्सूल को बेहद तेज रफ्तार और खतरनाक हालात के लिए बनाया गया है। यह अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफर कर सकता है और पृथ्वी पर लौटते समय इसकी स्पीड करीब 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। ऐसे में इसका खास हीट शील्ड इसे करीब 2,700 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान से बचाता है, जिससे अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रहते हैं और कैप्सूल को कोई नुकसान नहीं होता।
लाइफ सपोर्ट
पावर सिस्टम और उन्नत लाइफ सपोर्ट की ताकत
इस कैप्सूल में सौर पैनल लगे हैं, जो इसे लगातार ऊर्जा देते हैं और मिशन को सफल बनाने में मदद करते हैं। इसमें उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम मौजूद है, जो ऑक्सीजन, पानी और सही वातावरण बनाए रखता है। अपोलो मिशन के मुकाबले इसमें ज्यादा जगह और बेहतर तकनीक दी गई है, जिससे अंतरिक्ष यात्री ज्यादा आराम से रह सकें और भविष्य के लंबे स्पेस मिशनों के लिए मजबूत आधार तैयार हो सके।