क्या है जापान का सोलर लूनर रिंग प्रोजेक्ट, यह पृथ्वी के लिए होगा लाभकारी?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष के क्षेत्र में जापान जल्द एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत चांद के चारों ओर सोलर पैनलों की एक विशाल रिंग बनाने का विचार सामने आया है। जापानी इंजीनियरों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से अंतरिक्ष में लगातार सौर ऊर्जा पैदा की जा सकती है। अगर यह योजना सफल होती है तो इससे पृथ्वी को बड़ी मात्रा में साफ और नवीकरणीय ऊर्जा मिल सकती है।
प्रोजेक्ट
क्या है जापान का लूना रिंग प्रोजेक्ट?
यह योजना जापान की इंजीनियरिंग कंपनी शिमिज़ु कॉर्पोरेशन ने पेश की है। इसके अनुसार चांद के भूमध्य रेखा यानी इक्वेटर के चारों ओर सोलर पैनलों की एक लंबी बेल्ट बनाई जाएगी। यह रिंग लगभग 6,800 मील यानी करीब 11,000 किलोमीटर तक फैली होगी और इसकी चौड़ाई लगभग 400 किलोमीटर बताई गई है। इस विशाल ढांचे पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे जो अंतरिक्ष में लगातार सूर्य की रोशनी से ऊर्जा पैदा करेंगे।
निर्माण
प्रोजेक्ट में कैसे होगा निर्माण कार्य?
इस प्रोजेक्ट में इंसान सीधे निर्माण नहीं करेंगे बल्कि खास रोबोट इसका काम संभालेंगे। ये ऑटोनॉमस रोबोट चांद की मिट्टी निकालेंगे, उसे निर्माण सामग्री में बदलेंगे और फिर सोलर पैनल लगाकर पूरी रिंग तैयार करेंगे। रोबोट लंबी दूरी तक खुदाई और सामग्री ढोने का काम भी कर सकेंगे। भविष्य में जापान की अंतरिक्ष एजेंसी और नासा जैसे संस्थान भी इस तरह की तकनीक विकसित करने में मदद कर सकते हैं।
लाभ
पृथ्वी को कैसे मिलेगी बिजली?
इस प्रोजेक्ट से बनने वाली ऊर्जा चांद पर ही नहीं रहेगी। योजना के अनुसार, सौर ऊर्जा को माइक्रोवेव या लेज़र बीम में बदलकर पृथ्वी पर भेजा जाएगा। पृथ्वी पर मौजूद खास रिसीविंग स्टेशन इस ऊर्जा को प्राप्त करेंगे और फिर इसे दोबारा बिजली में बदल देंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे दुनिया को लगातार स्वच्छ ऊर्जा मिल सकती है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।
अन्य
भविष्य में बदल सकता है ऊर्जा का स्वरूप
यह योजना अभी एक कॉन्सेप्ट के रूप में देखी जा रही है, लेकिन वैज्ञानिक इसे भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम मानते हैं। अगर रोबोटिक निर्माण और वायरलेस पावर ट्रांसमिशन जैसी तकनीक और विकसित होती है, तो यह प्रोजेक्ट वास्तविकता बन सकता है। इससे दुनिया में ऊर्जा उत्पादन के तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं और भविष्य में अंतरिक्ष आधारित ऊर्जा सिस्टम संभव हो सकते हैं।