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क्या है AI साइकोसिस? नई शोध में इसे लेकर जताई गई गंभीर चिंता
AI साइकोसिस को लेकर नई शोध में जताई गई गंभीर चिंता

क्या है AI साइकोसिस? नई शोध में इसे लेकर जताई गई गंभीर चिंता

Mar 17, 2026
01:50 pm

क्या है खबर?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक से लाभ हो रहा, लेकिन इनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। द लैंसेट साइकियाट्री जर्नल में पब्लिश एक नई स्टडी ने इस चिंता को और बढ़ाया है। इस रिसर्च की अगुवाई डॉ. हैमिल्टन मॉरिन ने की है। इसमें पाया गया कि ये टूल मदद के लिए बनाए गए हैं, लेकिन कुछ यूजर्स में गलत सोच (AI साइकोसिस) को भी मजबूत कर सकते हैं।

रिसर्च

रिसर्च में क्या सामने आया है?

डॉ. हैमिल्टन मॉरिन की टीम ने करीब 20 मीडिया रिपोर्ट्स का विश्लेषण किया। इसमें ऐसे कई मामले सामने आए जहां चैटबॉट ने यूजर्स की गलत सोच को रोकने के बजाय उसे बढ़ावा दिया। रिसर्च में यह भी पाया गया कि भ्रम आमतौर पर तीन (बड़े, रोमांटिक और डर) तरह के होते हैं से जुड़े। खासकर वे लोग ज्यादा जोखिम में पाए गए जो पहले से मानसिक समस्याओं या साइकोसिस के शुरुआती चरण में थे।

AI साइकोसिस

AI साइकोसिस क्या है?

साइकोसिस कोई आधिकारिक बीमारी नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति को कहा जा रहा है जब कोई व्यक्ति चैटबॉट के जवाबों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने लगता है। इससे उसके गलत या भ्रम वाले विचार और मजबूत हो सकते हैं। आसान शब्दों में, व्यक्ति बार-बार AI से पुष्टि लेता है और धीरे-धीरे वही सोच सच लगने लगती है, जिससे मानसिक संतुलन पर असर पड़ सकता है और व्यवहार में भी बदलाव दिख सकता है।

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राय

विशेषज्ञों की राय और आगे की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि AI सीधे मानसिक बीमारी पैदा नहीं करता, लेकिन यह मौजूदा समस्याओं को और अधिक बढ़ा सकता है। डॉ. रेगी गिरगिस और अन्य एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे मामलों में सावधानी जरूरी है। कंपनियां सेफ्टी सुधारने पर काम कर रही हैं, लेकिन अभी और क्लिनिकल रिसर्च की जरूरत है। डॉक्टरों और परिवारों को भी सतर्क रहना चाहिए, ताकि समय पर सही मदद मिल सके और यूजर्स को नुकसान से बचाया जा सके।

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